नवनिर्वाचित निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य भी फिलहाल असमंजस की स्थिति में है। बड़ी संख्या में ऐसे निर्दलीय सदस्य हैं जो सतारुढ़ दल भाजपा को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहते है। वे सतारुढ़ दल के साथ ही रहकर आगामी नौ महीने तक सत्ता सुख का आनंद लेना चाहते हैं।
वहीं, कुछ ऐसे प्रभावशाली सदस्य भी हैं जो मानते हैं कि अभी तन, मन और धन लगाकर यदि भाजपा के बैनर पर जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद यदि 2022 में सत्ता का ऊंट दूसरी करवट बैठा तो उनकी कुर्सी भी तलवार लटक सकती है।