आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे 16 गांवों को लखनऊ विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में शामिल किया जाएगा। इन गांवों की व्यावसायिक उपयोगिता को बढ़ाने के लिए उनको एलडीए के भीतर लाने की तैयारी है।
आगरा एक्सप्रेस वे के दोनों ओर सरकार कॉमर्शियल और रिहायशी रीयल इस्टेट डवलपमेंट भी करेगा। ऐसे में इनको एक विकास प्राधिकरण की जद में भी लाया गया है।
एलडीए में लखनऊ सदर तहसील के ये गांव काकोरी ब्लॉक की जद में आते हैं। इनको विकास प्राधिकरण क्षेत्र में लाने की अधिसूचना इसलिए की जा रही है क्योंकि एलडीए में आने के बाद व्यवसायिक तौर पर ये गांव उपयोगी हो जाएंगे।
एक ऐसी सड़क जिसके बनने से लखनऊ से दिल्ली का रास्ता आधे से भी कम समय में तय हो जाएगा। यानी केवल छह से सात घंटे में दिल्ली तककी दूरी तय होगी।
लखनऊ से आगरा के बीच बनने वाले सिक्स लेन एक्सप्रेस-वे को आगरा में ताज एक्सप्रेस-वे (आगरा से नोएडा) से जोड़ दिया जाएगा। इस तरह से लखनऊ से आगरा करीब 380 किलोमीटर का रास्ता 300 किलोमीटर ही रह जाएगा।
यह परियोजना करीब 9800 करोड़ रुपये की है। यह न केवल आगरा बल्कि दिल्ली तक के सफर को आसान बना देगा। इस सड़क को सरकार अपने दम पर यूपी एक्सप्रेस वे डवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) के जरिये बनवाने जा रही है।
सड़क पांच खंडों में बनेगी, जिसमें एक खंड का शिलान्यास भी सरकार ने कर दिया है। जिसके लिए 3280 करोड़ रुपये की व्यवस्था कुछ दिन पहले प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष-2014-15 के बजट में कर दी है।
तीन साल में यह परियोजना पूरी कर ली जानी है। सरकार अब इसको अपने दम पर बनाने के लिए तैयार है। 300 किलोमीटर तक की इस सिक्सलेन एक्सप्रेस-वे परियोजना को ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के तहत भी विकसित किया जाएगा।
फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, इटावा, मैनपुरी, कन्नौज और लखनऊ में मोहान रोड (मलिहाबाद के काफी करीब) से गुजरेगा। इनमें से फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, इटावा, मैनपुरी, कन्नौज और मलिहाबाद के नजदीक से गुजरने वाले विकल्प पर मुख्यमंत्री ने मुहर लगाई।
जिला प्रशासन लखनऊ की ओर से काकोरी ब्लॉक और सदर तहसील के 16 गांवों को इसी लक्ष्य को लेकर एलडीए की सीमा में शामिल करने का फैसला किया गया है। अब इसका प्रस्ताव 12 नवंबर को यूपी कैबिनेट में रखा जाएगा।