नवरात्र के दिनों में आबाद रहने वाला रजिस्ट्री दफ्तर इस बार खाली-खाली सा रहा। इस बार नवरात्र में बस नाममात्र के लोगों ने रजिस्ट्री कराई है।
रजिस्ट्री में पिछली बार की तुलना में करीब 60 फीसदी की गिरावट आई है। दरअसल भू-संपत्तियों की रजिस्ट्री में इनकम टैक्स विभाग का फरमान भारी पड़ रहा है।
पांच लाख अथवा उससे अधिक के मूल्य की भू संपत्ति के निबंधन(रजिस्ट्री) पर एक प्रतिशत की दर से टीडीएस कटौती के निर्देश ने निबंधन विभाग के लिए परेशानी खड़ी कर दी है।
निबंधन विभाग के अधिकारी अब शासन की सहमति के बाद आयकर विभाग के इस फरमान से राहत दिलाने के लिए न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी में जुट गए हैं।
लखनऊ परिक्षेत्र के एआईजी निबंधन ओपी सिंह भी आयकर विभाग के पांच लाख से अधिक की कीमत से अधिक की भू-संपत्तियों के निबंधन पर एक प्रतिशत की दर से टीडीएस काटने के फरमान को अव्यवहारिक बताते हैं।
उनका कहना है कि इसके चलते ही अब खरीददार भू संपत्तियों का निबंधन कराने से बचने लगे हैं। भू-संपत्तियों के निबंधन में लगे इस ब्रेक का खामियाजा प्रदेश सरकार को स्टांप ड्यूटी की बिक्री में आई भारी कमी के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि पांच लाख से अधिक की संपत्ति पर एक प्रतिशत टीडीएस के साथ ही इनकम टैक्स विभाग सर्किल रेट व विक्रय प्रतिफल के बीच के अंतर पर भी तीस प्रतिशत की दर से डीम्ड टैक्स की वसूली संपत्ति बेचने वालों से कर रहा है।
इसके लिए विभागीय अधिकारी आयकर अधिनियम की धारा 66 (2) को आधार बनाने की बात कह रहे हैं।
एआईजी निबंधन ने बताया कि आयकर विभाग द्वारा टीडीएस कटौती के लिए पांच लाख की राशि का निर्धारण ही निबंधन विभाग को भारी पड़ रहा है।
रजिस्ट्री खर्च के साथ एक प्रतिशत की टीडीएस कटौती के खौफ से भू-संपत्तियों के निबंधन कार्य में सिर्फ लखनऊ ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में एक ठहराव सा आ गया है।
उन्होंने बताया कि निबंधन विभाग द्वारा इस बाबत शासन को भी विस्तार से पूरे प्रकरण से अवगत करा दिया गया है।
शासन से इस संबंध में निबंधन विभाग को आयकर विभाग के खिलाफ हाई कोर्ट में रिट दाखिल किए जाने के संबंध में भी औपचारिक सहमति भी मिल गयी है। जल्द ही विधि विभाग से मशवरे के आधार पर रिट दाखिल किए जाने की तैयारी है।