एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों में इबोला वायरस की जांच के इंतजाम नाकाफी हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार से आई चिकित्सकों की टीम ने एयरपोर्ट पर तैनात चिकित्सा इंतजामों की जांच के बाद उसे आधा-अधूरा बताया है।
दो सदस्यीय टीम ने बुधवार को अचानक एयरपोर्ट का निरीक्षण किया था। आतंक का पर्याय बने इबोला वायरस से संक्रमित यात्रियों की पहचान के लिए एयरपोर्ट पर चिकित्सकों की एक टीम तैनात की गई थी।
टीम का काम अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों में इबोला वायरस के संक्रमण की जांच करनी थी।
स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों को देखने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के डॉ. के के मित्रा व एक अन्य चिकित्सक अचानक एयरपोर्ट पहुंच गए।
वहां उन्होंने जांच में पाया कि जिस टीम की तैनाती एयरपोर्ट पर की गई है उसके पास न तो खुद को वायरस से बचाने के संसाधन हैं और न ही वहां मरीज की जांच करने के लिए स्ट्रेचर या बैठने की व्यवस्था।
यहां तक कि टीम जहां पर थी वो जगह भी आईसोलेटेड नहीं थी। वहां एयरकंडीशनर नहीं लगा था। वेंटिंग एरिया में बैठने की व्यवस्था नहीं थी। चिकित्सकों को मरीजों की जांच का तरीका भी नहीं बताया गया था।
सिर्फ खानापूर्ति के लिए राउंड दि क्लॉक एक-एक टीम की तैनाती कर दी गई थी। इन कमियों की जानकारी सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव को भी दी गई है।
गौरतलब है कि इबोला वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए अलर्ट के बाद एयरपोर्ट पर चिकित्सकों की टीम तैनाती की गई थी। साथ ही आशियाना के लोकबंधु राजनारायण अस्पताल में छह बेड भी आरक्षित किए गए थे।
उस दौरान ही अमर उजाला ने इन इंतजामों को नाकाफी बताया था। इसमें मुख्य रूप से चिकित्सकों के प्रशिक्षण, संभावित रोगी की जांच के दौरान खुद को संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी उपायों की भी अनदेखी की गई थी।
यही कमियां भारत सरकार की टीम ने भी पाई हैं। हाल ही में अफ्रीकी देशों 65 वैज्ञानिकों के दल भारत आया था। इनके इबोला से संक्रमण की आशंका बताई जा रही थी।
इसके बाद से एयरपोर्ट पर सुरक्षा इंतजामों की जांच की जा रही थी।