कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक।
लखनऊ। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रेम, करुणा और सज्जनता जिसमें होती है, वही सनातनी है। भगवान बुद्ध ने भी प्रेम, करुणा, दया और मानवता का संदेश दिया। सनातन संस्कृति कहती है कि सबको साथ लेकर चलेंगे, लेकिन आज स्थिति बदल गई है। लोगों में स्वार्थसिद्धि और संपत्ति संग्रह की भावना घर कर गई है। एक दूसरे को गिराकर आगे बढ़ने की भावना प्रबल हो गई है, लेकिन सनातन का मतलब है कि हमें हंसते रहना है और समाज को आगे बढ़ाना है।
उप मुख्यमंत्री सनातन संगम न्यास की ओर से सहकारिता भवन प्रेक्षागृह में रविवार को आयोजित सनातन धर्म समागम में बोल रहे थे। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सद्भावना का देश है, जहां प्रत्येक व्यक्ति सनातनी है। पाठक ने कहा कि सनातन देखना हो तो प्रयागराज जाइए, उन्होंने समानता के उदाहरण के तौर पर कहा कि क्या अदाणी, अंबानी, क्या गरीब भिखारी, सभी एक घाट पर बिना भेदभाव के संगम में डुबकी लगा रहे हैं। यही सनातन है।
सनातन संगम न्यास के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण ने कहा कि जो चिरकाल से है, जो शाश्वत है, जो अपरिवर्तनीय है, वही सनातन है। जब इस शब्द का प्रयोग किसी दर्शन के संबंध में किया जाता है तो इसका अर्थ उन सिद्धांतों से होता है जो किसी व्यक्ति की ओर से नहीं बनाए गए, बल्कि स्वयं प्रकृति ने मानव को उसके धर्म स्वरूप दिए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रकृति की ओर से दिए गए सनातन मूल्य वे हैं जिन पर चलकर व्यक्ति अपना व संपूर्ण सृष्टि का मंगल कर सकता है। यह सनातन मूल्य प्रेम, करुणा, मैत्री, समानता सद्भावना व समन्वय का प्रतीक हैं। इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के सदस्य तरूणेश बौद्ध, विधानसभा सदस्य ओपी श्रीवास्तव सहित कई लोग उपस्थित रहे।