लखनऊ। अमुक आर्टिस्ट ग्रुप की ओर से शनिवार को संगीत नाटक अकादमी में नाटक ‘संदूक’ का मंचन हुआ, जिसमें लोक संस्कृति और ग्रामीण परिवेश की धनाढ्यता का मर्म दिखा। वहीं दूसरे नाटक ‘खंडहरों का साम्राज्य’ में मानवीय विभीषिका का दर्द परिलक्षित हुआ। मेजर संजय कृष्ण और सुशील कुमार सिंह ने रंगकर्मी ज्योति पांडेय को डॉ. विश्वनाथ मिश्र स्मृति सम्मान से नवाजा।
नाटक की शुरुआत लेखक प्रमथनाथ विषी की लोक कथा संदूक से होती है। नाटक में दिखाया गया कि जिस व्यक्ति के पास संदूक होता है, उसे गांव के लोग धनी मानते हैं। ग्रामीण रामबाबू को ये खुशनसीबी थी कि उनके पास संदूक था। रामबाबू की मौत के बाद बेटों ने जब संदूक खोलकर देखा तो वह खाली था और मौजूद थी तो सिर्फ एक चिट्ठी।
वहीं सुशील कुमार सिंह के लिखे नाटक ‘खंडहरों का साम्राज्य’ में रानी अशांति अपने खंडहर में कीड़ों, मानव कंकाल, लाशों का ढेर के बीच, भूख से मरते लोगों के बीच राज करती है। देवी की सबसे बड़ी कमजोरी शांति की छाया पड़ना है। अशांति देवी जैसे ही शांति को मारने आगे बढ़ती है उसका क्षरण होने लगता है। वह मरती है तो प्रकृति हरी होने लगती है।