फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: ‘किस्सा किस्सों का’ में बच्चों ने रच दी रंगमंच पर सौहार्द की कविता

विज्ञापन
संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे सभागार में नाटक ‘किस्सा किस्सों का’ का मंचन करते बाल कलाकार। -सं
विज्ञापन
लखनऊ। सोमवार की शाम संगीत नाटक अकादमी का मंच सिर्फ़ मंच नहीं था, वह रंगों, किस्सों, तालियों और जज़्बातों से भरा एक सपना था। और उस सपने को हकीकत में बदला बीएनए की नाट्य कार्यशाला से निकले उन 50 नन्हे कलाकारों ने, जिन्होंने ''किस्सा किस्सों का'' नाटक के जरिये रंगमंच पर सद्भावना का झंडा लहरा दिया।
विज्ञापन


इस नाटक ने महज कहानियां नहीं सुनाईं... इसने एक गांव की मिट्टी में रची कहानियों को सांस दी। राम रहीमपुर गांव से शुरू हुआ किस्सा हमें लेकर गया अरब की गलियों तक, जहां अलीबाबा और चालीस चोर अब भारतीय रंगत में ढले हुए थे।
फुर्सत मियां, जो बच्चों को किस्सों की सौगात देते हैं, वही सूत्रधार बने और उनके जरिये नाटक में रामायण और महाभारत के वीर योद्धा भी मंच पर जीवंत हुए। अभिमन्यु बना नन्हा कुंज, जिसकी संवाद अदायगी ने दर्शकों को स्तब्ध कर दिया। वहीं शुकोह नवाब ने फुर्सत मियां की भूमिका में जान फूंक दी। डाकू मुस्तफा हैदर बने कुशाग्र कृष्ण, और मरजीना के रूप में ऐश्विका सिंह ने अपने अभिनय से सबका दिल जीत लिया। झंझनाहट सिंह के किरदार में अर्नव द्विवेदी ने अपनी छाप छोड़ी। अन्य बच्चों मेंं अली बाबा बने एलैक्स बिश्नोई, बजरंगी बने अयांश मिश्रा और छोटा अली व राजकुमार बने स्वास्तिक मिश्रा नाहर ने खूब वाहवाही लूटी।
विज्ञापन


नाटक का प्लॉट जैसे ही बजरंगी और मरजीना की जोड़ी के जरिये आतंकवाद के खात्मे और गांव को बचाने तक पहुंचा, तालियों की गूंज ने बता दिया कि यह सिर्फ नाटक नहीं, एक सामाजिक उद्घोष है... बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अच्छाई की एक चिंगारी ही काफी है उसे बुझाने के लिए। यह सिर्फ एक मंचन नहीं था, यह बचपन की आंखों से देखा गया एक समावेशी, सुंदर और सशक्त भारत था।

नाट्य गुरु वाल्टर पीटर के निर्देशन में बाल कलाकारों की अदायगी ने जीता दिल
सहायक निर्देशक सारांश भट्ट और नृत्य संयोजन में हर्षिता मिश्रा का योगदान मंच पर साफ झलकता है और जिस जज्बे और अनुशासन के साथ बच्चों ने प्रस्तुति दी, वह प्रशिक्षक वाल्टर पीटर की लगन और दृष्टि का जीवंत प्रमाण था। कार्यक्रम में बीएनए अध्यक्ष रतिशंकर त्रिपाठी, निदेशक बिपिन कुमार, डॉ. सुमित श्रीवास्तव और संगीत नाटक अकादमी के निदेशक डॉ. शोभित नाहर भी उपस्थित रहे, जिन्होंने बच्चों के उत्साह को सराहा और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें