इम्तियाज ने कहा जब मैं पढ़ाई करता था तब टीचर क्या पढ़ा रहे हैं यह मैं बहुत अच्छे से सुनता जरूर था लेकिन कुछ भी दिमाग में नहीं जाता था। क्योंकि मेरे दिल में कुछ चलता था। आज मैं वही चीजें अपनी फिल्मों के जरिए दिखाता हूं। अगर मेरी कोई फिल्म फ्लॉप होती है तो मुझे मायूसी नहीं होती। वो मेरी नाकामयाबी नहीं होती, मैं उसे सामान्य तौर पर ही लेता हूं।
इम्तियाज अली ने बताया कि डायरेक्टर एक मजदूर की तरह होता है जिसे अपनी हर फिल्म के लिए शुरूआत से उतनी ही मेहनत करनी पड़ती है। अब तक बतौर निर्माता मैने सिर्फ हाइवे मूवी दी है। जल्द ही मैं अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस खोलने की तैयारी में हूं। मैंने 7-8 स्टोरी लिखकर तैयार कर ली हैं। उम्मीद है इसमें से किसी की शूटिंग फरवरी-मार्च से शुरू हो जाए। इस मौके पर उन्होंने अपने बचपन से जुड़े किस्से और अपनी मां व शायर दोस्त इरशाद कामिल के किस्से भी सुनाए।