लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने कहा है कि एंटीबायोटिक दवाओं का सही इस्तेमाल न होना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मन की बात कार्यक्रम में एंटीबायोटिक दवाओं से प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने संबंधी चिंता जाहिर करने के बाद विभागाध्यक्ष ने इस संबंध में वीडियो जारी किया है।
प्रो. सूर्यकांत के मुताबिक, एंटीबायोटिक दवाओं से प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने के कारण दुनिया भर में हर साल करीब 50 लाख लोगों की मौत हो रही है। प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने से टीबी, निमोनिया, मूत्राशय संबंधी संक्रमण, त्वचा व सॉफ्ट टिश्यू संक्रमण, सेप्सिस जैसे गंभीर रोगों का इलाज कठिन हो जाता है। इसी वजह से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे मानवता के सामने मौजूद शीर्ष 10 वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में शामिल किया है।
इसका सबसे बड़ा कारण एंटीबायोटिक दवाओं का बहुत ज्यादा और अविवेकपूर्ण इस्तेमाल, बिना जरूरत दवाएं लेना, गलत खुराक, अधूरी अवधि तक इलाज और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का सेवन शामिल है। मेडिकल स्टोर पर बिना प्रिस्क्रिप्शन एंटीबायोटिक दवाएं मिल जाना भी इस समस्या को बढ़ा रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर की सख्त स्वास्थ्य नीति और एंटीबायोटिक प्रबंधन कार्यक्रम की जरूरत है। वहीं, केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानन्द ने भी एएमआर पर जन-जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर जोर दिया।