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सीएम की अध्यक्षता में कैबिनेट की अहम बैठक आज, इन अहम प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर

Tue, 20 Aug 2019 12:24 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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सीएम योगी
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को प्रदेश कैबिनेट की बैठक होगी। इसमें तमाम संवर्ग के कर्मचारियों को पूर्व से मिल रहे कई भत्तों को खत्म करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी जा सकती है। हालांकि, दिव्यांग कर्मियों का वाहन भत्ता बढ़ाने का प्रस्ताव है। कैबिनेट बैठक में कई नियमावलियों में संशोधन के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई जा सकती है।
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राज्य वेतन समिति-2016 ने कर्मियों को पूर्व से दिए जा रहे कई भत्तों को अप्रासांगिक बताते हुए उसे खत्म करने की सिफारिश की थी। वर्तमान में अलग-अलग संवर्ग के कर्मियों को परियोजना भत्ता, कैश हैंडलिंग भत्ता, स्नातकोत्तर भत्ता, स्वैच्छिक परिवार कल्याण भत्ता और नए कर्मियों को द्विभाषी प्रोत्साहन व कंप्यूटर संचालन भत्ता मिल रहा है। राज्य वेतन समिति ने इन भत्तों को गैरजरूरी बताते हुए खत्म करने की संस्तुति की थी। वित्त विभाग इस पर निर्णय का प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष ला रहा है। लिहाजा कई भत्तों पर कैंची चलनी तय मानी जा रही है।

इसी तरह वेतन समिति ने दिव्यांग कर्मियों का वाहन प्रतिपूर्ति भत्ता बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसमें दिव्यांगजन कर्मचारियों को कार्यस्थल आने तथा वापस जाने के लिए मिल रहे भत्ते में तीन गुना वृद्धि की संस्तुति की गई है। इनमें लेवल-1 के कर्मियों का 450 की जगह 900, लेवल-2 से 5 तक का 600 से बढ़ाकर 1200 व लेवल-6 व इससे अधिक को 750 की जगह 1500 रुपये देने का प्रस्ताव है। 
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इसी तरह शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के राजकीय विद्यालय, मूक तथा बधिर राजकीय विद्यालय तथा राजकीय दृष्टिबाधित विद्यालयों के शारीरिक रूप से अक्षम श्रेणी में आने वाले शिक्षकों का वाहन प्रतिपूर्ति भत्ता भी बढ़ाने की संस्तुति की गई है। प्रधानाध्यापक का भत्ता 750 से बढ़ाकर 1500 व शिक्षकों का भत्ता 600 से बढ़ाकर 1200 करने की संस्तुति की गई है। इसमें कितनी वृद्धि होनी है, इस पर फैसला कैबिनेट करेगी।
 

वेतन समिति ने की है इन भत्तों को खत्म करने की सिफारिश

  • परियोजना भत्ता : सिंचाई विभाग की बड़ी परियोजनाओं व जल विद्युत परियोजनाओं में कार्य स्थल अथवा कार्यस्थल के पास आवासीय सुविधा न होने के एवज में परियोजना से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों को परियोजना भत्ता दिया जाता था। परियोजना चालू होने पर तीन वर्ष बाद खत्म कर दिया जाता था। परियोजना भत्ता मकान किराया भत्ते के एवज में दिया जाता था। अब सभी वर्गीकृत नगरों व अवर्गीकृत क्षेत्रों के लिए मकान किराया भत्ता स्वीकृत हो रहा है। ऐसे में परियोजना भत्ते को गैरजरूरी बताते हुए इसे खत्म करने की संस्तुति की गई है।
  • कैश हैंडलिंग भत्ता : कैशियर, अकाउंटेंट, स्टोरकीपर व अन्य अधीनस्थ कर्मचारियों, जिन्हें नकदी भंडारों अथवा मूल्यवान वस्तुओं की रक्षा की जिम्मेदारी होती है, उनसे तय राशि जमा कराई जाती है। इसके बदले ऐसे कर्मियों को कैश हैंडलिंग भत्ता दिया जाता है। समिति ने नकद भुगतान की व्यवस्था लगभग समाप्त होने का हवाला देते हुए कैश हैंडलिंग भत्ता खत्म करने की संस्तुति की है। 
  • स्नातकोत्तर भत्ता : समिति ने यह भत्ता खत्म करने की सिफारिश की है। तर्क दिया गया है कि चूंकि यह सुविधा वेतन व स्नातकोत्तर भत्ते के योग 4500 रुपये अधिकतम निर्धारित थी। सातवें पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स में न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये कर दिया गया है। ऐसे में स्नातकोत्तर भत्ते का कोई औचित्य नहीं रह गया है।
  • स्वैच्छिक परिवार कल्याण भत्ता : केंद्र सरकार ने सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों की समीक्षा के बाद इस भत्ते को निरस्त कर दिया है। राज्य वेतन समिति ने सिफारिश की है जिन कर्मियों को वर्तमान में यह भत्ता मिल रहा है, उन्हें यथावत बनाए रखा जाए। आगे से यह भत्ता मंजूर न किया जाए।

नए कर्मियों को द्विभाषी प्रोत्साहन व कंप्यूटर संचालन भत्ता नहीं

सचिवालय तथा राजकीय कार्यालयों में कार्यरत द्विभाषी टंककों तथा आशुलिपिकों, वैयक्तिक सहायकों व निजी सचिवों को वर्तमान में क्रमश: 100 व 300 रुपये प्रतिमाह द्विभाषी प्रोत्साहन भत्ता मिल रहा है। समिति ने इन सेवाओं में द्विभाषी टंकण को अनिवार्य अर्हता के रूप में शामिल किए जाने से इस भत्ते का औचित्य नहीं माना।

हालांकि जिन कार्मिकों को पूर्व से यह भत्ता मिल रहा है, वे पाते रहेंगे। भविष्य में सेवा में आने वाले कर्मियों को यह भत्ता न देने की सिफारिश की गई है। इसी तरह कंप्यूटर संचालन भत्ते के बारे में पूर्व वेतन समिति की संस्तुतियों को लागू करने पर सहमति दी है। नए कर्मियों को यह भत्ता भी नहीं मिलेगा।
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इन प्रस्तावों को मिल सकती है मंजूरी

  • सरकार बच्चों की देखरेख और संरक्षण की पुख्ता व्यवस्था के लिए नई नियमावली बनाने जा रही है। इसके लिए किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) नियम- 2019 को मंजूरी देने की तैयारी है।
  • भूगर्भ जल विभाग में समूह ‘ख’ व ‘ग’ के सीधी भर्ती कोटे के रिक्त पदों को भरने के लिए सेवानिवृत्त कार्मिकों को नियुक्त करने की कैबिनेट से मंजूरी लेने की योजना है। ये पद संविदा के आधार पर भरने का प्रस्ताव है।
  • प्रदेश में विश्व बैंक की सहायता से कोर रोड नेटवर्क डवलपमेंट परियोजना चल रही है। इसमें रोड सेफ्टी घटक को जोड़ने का प्रस्ताव है। इन प्रस्तावों को कैबिनेट की मंजूरी मिलने की संभावना है।
  • अधीनस्थ नर्सिंग अराजपत्रित सेवा नियमावली-2019 में पांचवें संशोधन को भी मंजूरी मिल सकती है। 
  • डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ के संकायी सदस्यों, गैर संकायी सदस्यों, गैर संकायी अधिकारियों व कर्मचारियों तथा रेजीडेंट डॉक्टर्स को संजय गांध आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ के समान भत्ते देने का प्रस्ताव है।
  • चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन सुपर स्पेशियलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड हॉस्पिटल लखनऊ को संचालित करने के लिए अंतरिम व्यवस्था के रूप में औषधियों, सर्जिकल व कंज्यूमेबल आइटम की खरीद एसजीपीजीआई लखनऊ के चालू दरों पर करने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल सकती है।
  • डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि लखनऊ में वनस्पति उद्यान व योग केंद्र की स्थापना के लिए धन को मंजूरी मिल सकती है।
  • कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव है। इसके लिए स्टांप शुल्क व रजिस्ट्रेशन शुल्क के भुगतान में छूट संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है।
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