लखनऊ। राज्य संग्रहालय में बुधवार को प्रागैतिहासिक भारत की संस्कृतियां विषय पर व्याख्यान हुआ। विशेषज्ञयों ने हस्त कुठार (उस समय के हथियार) के विकास पर प्रकाश डाला। कहा कि पत्थरों के औजारों से सभ्यता का सफर शुरू हुआ था। आदिम संस्कृति का महत्व समझाया गया।
राज्य संग्रहालय और संस्कृति विभाग के कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता लविवि के प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार के व्याख्यान से हुआ। उन्होंने चित्रों के माध्यम से समझाया कि समय के साथ पत्थरों के औजारों की बनावट और उपयोग में कैसे बदलाव आए। राज्य संग्रहालय के निदेशक डॉ. विनय कुमार सिंह और सहायक निदेशक डॉ. मीनाक्षी खेमका ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर शारदा प्रसाद, प्रीती साहनी, डॉ. अनीता चौरसिया, धनंजय कुमार राय, शालिनी श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।