मुजफ्फरनगर व शामली में दंगा पीड़ितों के लिए बने राहत शिविरों में रह रहे 103 लोगों पर सरकारी जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश करने में मुकदमा दर्ज हुआ है।
इसके तहत कुल चार मुकदमे दर्ज किए गए हैं। दो मुकदमे शामली के झिंझाना थाने में और दो मुकदमे मुजफ्फरनगर के शाहपुर थाने में दर्ज हुए।
आईजी कानून-व्यवस्था अमरेंद्र कुमार सेंगर ने राहत शिविरों में रह रहे ऐसे विस्थापितों के बारे में जानकारी दी, जो सरकारी जमीन पर कब्जा कर वहां पक्का निर्माण कराने की कोशिश में थे।
आईजी ने बताया कि पहला मुकदमा मुजफ्फरनगर के शाहपुर थाने में 18 नवंबर, 2013 को दर्ज हुआ। यह मुकदमा हरसौली के लेखपाल ने दर्ज कराया।
मामले में चार लोगों को नामजद किया गया जबकि पुलिस की पड़ताल में 18 और लोगों के नाम सामने आए। यहां सरकारी जमीन पर कुल 22 लोगों द्वारा पक्का निर्माण कराया जा रहा था। निर्माण प्रक्रिया को रुकवा दिया गया है।
दूसरा मुकदमा 29 नवंबर, 2013 को शामली के झिंझाना थाने में दर्ज हुआ। इसमें बीबीपुर के वन रक्षक गुलाब सिंह ने पुलिस को सूचना दी कि रोटन गांव में वन विभाग की जमीन पर वन विभाग के चिह्न को नष्ट कर पक्का निर्माण कराया जा रहा है।
यह निर्माण अफसर, डॉक्टर अहमद और शौकत करा रहे थे। पुलिस की पड़ताल में 27 अन्य के नाम सामने आए जो वहां पक्का निर्माण कराने की कोशिश कर रहे थे। यहां कुल 30 लोगों को नामजद किया गया है।
तीसरा मुकदमा 27 दिसंबर को मुजफ्फरनगर के शाहपुर थाने में 27 दिसंबर, 2013 को दर्ज हुआ। यह मुकदमा सांझक के लेखपाल ने दर्ज कराया।
इसमें कुल 29 लोग नामजद हुए। आईजी के अनुसार यह वही मामला है जिसमें कब्रिस्तान की जमीन पर निर्माण कराने की कोशिश में स्थानीय स्तर पर कुछ विवाद भी हुआ था।
चौथा मुकदमा शामली के झिंझाना थाने में 31 दिसंबर को दर्ज हुआ। यह मुकदमा राजस्व निरीक्षक ओम प्रकाश ने दर्ज कराया।
इसमें कहा गया है कि मंसूरा गांव में सरकारी जमीन पर नवाब आदि कुल 22 लोगों द्वारा पक्का निर्माण कराया जा रहा है। पुलिस ने इस मामले को भी लोक संपत्ति निवारण अधिनियम की धारा के तहत दर्ज किया है।
इनका जवाब नहीं
आईजी इस बात का जवाब नहीं दे सके कि इन मुकदमों में अभी तक किसी को गिरफ्तार किया गया अथवा नहीं। जो पक्का निर्माण हो रहा था, उसे गिराया गया अथवा नहीं।
जो लोग नामजद हुए उनमें ऐसे कितने हैं, जिन्होंने सरकार से पुनर्वास करने के लिए पांच लाख रुपये की रकम ले ली है। आईजी ने कहा कि इन बातों की जानकारी कर ही वह कोई जवाब दे सकेंगे।