स्कूल की जमीन पर ग्रुप हाउसिंग बनाने के मामले में बर्खास्त किए गए खादी ग्रामोद्योग विभाग के उपाध्यक्ष नटवर गोयल ने बिल्डिंग निर्माण में फिर हेराफेरी की है।
इस बार एलडीए से पास चार मंजिला मानचित्र के विपरीत यहां छह मंजिला भवन खड़ा कर दिया गया। रविवार को इसी बिल्डिंग की छठी मंजिल से गिरकर एक मजदूर की मौत हो गई थी।
एलडीए के इंजीनियरों की शह पर हुए अवैध निर्माण का मामला खुलने के बाद एलडीए उपाध्यक्ष ने जांच का आदेश दिया है। दूसरी ओर नटवर गोयल का कहना है कि उन्होंने अतिरिक्त निर्माण के संबंध में कंपाउंडिंग जमा करा दी है।
इस तरह हुई घटना
वाल्मीकि मार्ग पर बालाजी कांस्ट्रक्शन की बीसीसी रेजीडेंसी नाम से अपार्टमेंट बन रहा है। रविवार को इसके छठे तल पर पुताई का काम चल रहा था।
इसी दौरान मजदूर का पैर फिसल गया। जिससे मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद वहां स्थानीय लोगों का जमावड़ा लग गया।
इसके तुरंत बाद ही मजदूर का शव लेकर कहीं चले गए। हादसे के घंटों बाद मौके पर न तो पुलिस पहुंची और न ही एलडीए के अधिकारी।
हादसे के बाद पूरे इलाके में बिल्डर के कारिंदे घूमते रहे ताकि स्थानीय लोग भी किसी से बात न कर सकें। मौके पर गए लोगों ने बताया कि हादसा दोपहर तीन बजे हुआ।
शुरुआत से ही गड़बड़झाला
साल 2012 में नटवर गोयल ने सत्ता की धमक के बल पर पहले तो नावेल्टी के पीछे कैपर रोड पर एक सरकारी की स्कूल की भूमि को अपनी ग्रुप हाउसिंग की साइट में शामिल करवा लिया।
यहां राजा अयोध्या की प्रापर्टी को नटवर ने हासिल किया था,जिसमें एक सरकारी स्कूल भी था। राजा अयोध्या की इस जमीन में काफी परिवार रहते थे,जिनको इसी जमीन के पास एक अपार्टमेंट बना कर बसा दिया गया।
मजे की बात यह है कि जिस अपार्टमेंट में यहां के वाशिंदों का पुनर्वास किया गया,वह भी अवैध है। एकल आवासीय मानचित्र पास करा के इसको भी पांच मंजिल की ग्रुप हाउसिंग में तब्दील कर दिया गया था।
यहां लेसा से अवैध कनेक्शन के जरिये चकाचौंध होने पर भी तगड़ा जुर्माना किया गया था। इतनी सारी गड़बड़ियों के बावजूद गोयल इस इमारत का मानचित्र पास कराने में कामयाब हो गए।
अब यहां दो मंजिल अतिरिक्त बनाने का मामला सामने आया है।
पुरातत्व विभाग के मानकों के विपरीत
करीब एक लाख वर्ग फीट भूमि होने के बावजूद गोयल की इस इमारत को केवल चार मंजिल निर्माण का ही नक्शा पास किया गया।
दरअसल इस बिल्डिंग के नजदीक ही पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद है।
ऐसे में यहां पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के प्रतिबंधों का पालन करते हुए ही इमारत बन सकती है। मगर नटवर गोयल ने इन मानकों को ताक पर रख दिया। यहां चार की जगह छह मंजिला इमारत का निर्माण कर लिया गया।