सूबे के पूर्व प्रमुख वन संरक्षक डॉ. राम लखन सिंह 12 साल की कानूनी लड़ाई के बाद शीर्ष अदालत से बेदाग साबित हुए। कानूनी लड़ाई जीतने के बाद 1969 बैच के आईएफएस अधिकारी डॉ. राम लखन सिंह ने ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में बताया कि वर्ष 2003 में तत्कालीन मुलायम सरकार की बात नहीं मानी तो मुझे बेबुनियाद मामलों में फंसाकर जेल तक में डाल दिया गया।
उन्होंने बताया कि तत्कालीन सरकार ने उनसे कहा कि प्रतापगढ़ के बेंती पक्षी अभ्यारण्य को गैर अधिसूचित करा दें। इसके पीछे तर्क था कि पूर्ववर्ती मायावती सरकार ने सपा के एक कद्दावर नेता रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया की जमीन इस अभ्यारण्य में छीन ली।
डॉ. सिंह ने बताया कि चूंकि, प्रतापगढ़ के तत्कालीन कलेक्टर की रिपोर्ट में अभ्यारण्य की जमीन सरकारी बताई गई थी, इसलिए उन्होंने ऐसा करने से साफ इन्कार कर दिया। इसके बाद उन्हें 19 नवंबर 2003 को विभागाध्यक्ष के पद से हटाकर वेटिंग में डाल दिया गया। यही नहीं अगले ही दिन उनके खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश भी दे दिए गए।