अपने इनोवेशन के साथ छात्र पवन कुमार।
लखनऊ। इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष के छात्र पवन कुमार ने मिशन अंतरिक्ष के लिए बड़ा महत्वपूर्ण इनोवेशन किया है। पवन ने छोटा, हल्का और पर्यावरण के अनुकूल उपग्रह डिजाइन किया है, जो दो सैटेलाइट के बीच संपर्क बनाए रख सकता है। विशेषकर तब, जब वे एक-दूसरे की सीधी पहुंच में न हों। पवन के इस नवाचार को एमएसएमई आइडिया हैकथान 4.0 में चुना गया है। इसके तहत उसे 15 लाख की सहायता राशि प्रोटोटाइप निर्माण के लिए स्वीकृत की गई है।
पवन ने बताया कि इस विचार की शुरुआत 2024 में हुई थी। पवन का चयन इंटर्नशिप के लिए सूरत की एक कंपनी में हुआ था। उस कंपनी में पवन ने एक माह की इंटर्नशिप की, वहां उन्होंने सैटेलाइट डिजाइन और फैब्रिकेशन की बुनियादी जानकारी प्राप्त की और अंतरिक्ष की तकनीकी चुनौतियों को नजदीक से समझा।
पवन ने बताया कि इंटर्नशिप के दौरान उन्हें चंद्रयान-2 मिशन की याद आई। जब अंतिम समय में लैंडर का संपर्क टूट गया था। उस घटना ने उनके मन में एक विचार को जन्म दिया। क्या कोई ऐसा सैटेलाइट नेटवर्क बन सकता है, जो सिग्नल कमजोर होने पर उसे मजबूती प्रदान करे और मिशन को विफल होने से बचा सके?
इसी को ध्यान में रखकर उन्होंने क्यूब संचार का इनोवेशन किया है। यह उपग्रह धरती और चांद की कक्षा में रहकर सिग्नल को मजबूती देगा। जिससे चांद के उस हिस्से से भी संपर्क बना रह सके जो हमेशा पृथ्वी से छिपा रहता है। पवन ने कहा कि यह वर्तमान में बन रही सैटेलाइट से काफी कम खर्च में बन सकती है। उन्होंने इसके लिए अपने मेंटर सनी खबरावाला को धन्यवाद दिया है।
वहीं आईईटी निदेशक प्रो. विनीत कंसल, इन्क्यूबेशन सेंटर प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. सीतालक्ष्मी, डॉ. पुष्कर त्रिपाठी, डॉ. प्रदीप कुमार, संदीप कुमार आदि ने छात्र पवन कुमार को बधाई दी है।