मूर्ति चोरी होने के बाद लोगों की भीड़ जमा
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1997 में चोरों की नजरें इस बेशकीमती मूर्ति पर पड़ी और वह इसे उठा ले गए। करीब 20 वर्ष बाद पिछले साल अनिल सिंह के खेत की खुदाई के दौरान वही पुरानी महर्षि पराशर की अष्टधातु की मूर्ति बरामद हुई, लेकिन इस मूर्ति के हाथ और पैर नहीं मिले।
गांव वालों का कहना है कि शायद सैंपल के लिए चोर हाथ और पैर को काट ले गए थे। बाढ़ आ जाने के बाद चोर निकाल नहीं पाए और मूर्ति यही खेत में दबी रह गई।