500 और हजार के नोट बदलने के लिए बैंक पहचान पत्र तो ले रहे हैं, लेकिन यह तक नहीं देख रहे कि पहचान पत्र किसका है। ऐसे में आईडी के दुरुपयोग की आशंकाएं बढ़ गई हैं।
ऐसा ही एक मामला राजधानी में सामने आया है। एक निजी विश्वविद्यालय की रिसर्च स्कॉलर जब बड़े नोट बदलावाने बैंक पहुंचीं तो उन्हें बताया कि पहचान पत्र के रूप में जो पैन-कार्ड की कॉपी वे दे रही हैं, उसका इस्तेमाल पहले ही हो चुका है।
जबकि छात्रा के अनुसार उन्होंने कार्ड का उपयोग ही नहीं किया, छात्रा ने गोमतीनगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई है। किसी दूसरे के पहचान पत्र का इस्तेमाल करने का यह देश में पहला मामला है।
अमर उजाला से बातचीत में छात्रा पारुल त्रिपाठी ने बताया कि आठ तारीख को जब नोटबंदी की घोषणा हुई, तब वह लखनऊ में नहीं थीं। सोमवार को बैंक में छुट्टी थी, मंगलवार को वह मल्हौर स्थित विजया बैंक पहुंचीं।
यहां करीब पांच घंटे लाइन में इंतजार करने के बाद जब उनका नंबर आया तो बैंक स्टाफ ने बताया कि पहचान पत्र के रूप में उनके द्वारा दिया गया पैन कार्ड कोई और पहले ही उपयोग करके नोट बदलवा चुका है। पारुल हतप्रभ रह गईं।