प्रोन्नत आईएएस उमेश प्रताप सिंह ने बताया कि घटना वाली दोपहर वह अपने दोस्त ललित मिश्रा के साथ घर पर ही थे। दोपहर करीब ढाई बजे पहली मंजिल पर अनीता के कमरे से गोली चलने की आवाज सुनते ही वह ऊपर दौड़े। कमरे का दरवाजा भीतर से बंद था। उसे तोड़कर भीतर घुसे तो अनीता लहूलुहान सोफे पर पड़ी थी। उसकी सांसें चल रही थीं। उसे तुरंत निजी अस्पताल ले गए, लेकिन वहां उसे भर्ती करने से इनकार करते हुए ट्रॉमा सेंटर ले जाने के लिए कहा गया। ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सकों ने अनीता को मृत घोषित कर दिया।
एडीजी ने कहा पारिवारिक मामला
एडीजी पीएसी बीके सिंह ने राजीव की तरफ से दर्ज केस को उनका व उमेश का पारिवारिक मामला बताया। कहा, अनीता की मौत के बाद राजीव उनके घर व अस्पताल गए थे। उन्हें कुछ गलत लगा इसलिए एफआईआर कराई। बाकी तथ्य विवेचना में स्पष्ट होंगे। उमेश मेरे भी रिश्तेदार हैं और अनीता की मौत पर शोक प्रकट करने मैं भी उनके घर गया था।