'हर सरकारी फाइल के पीछे एक व्यक्ति है'
दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा के दौरान आम लोगों के जीवन में आए बदलावों को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने लिखा कि उस परिवार की आंखों में खुशी देखना, जिसे पहली बार जमीन का हक मिला, दिव्यांग व्यक्ति को सम्मान से जीने का अवसर मिलना और किसान के खेत तक पानी पहुंचना ही उनके जीवन का असली सुकून रहा। लोगों के संघर्षों में साथ चलते हुए उन्होंने सीखा कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक व्यक्ति होता है और उसकी गरिमा बनाए रखना ही न्याय है।
'मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आई हूं'
अपने संदेश में उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि वह समाज को कुछ देने आई हैं, लेकिन बाद में समझ आया कि सबसे ज्यादा उन्होंने खुद पाया। लोगों ने उनकी खुशी में उनसे ज्यादा खुशी मनाई और जब वह खुद थकी या टूटी थीं, तब भी लोगों ने उन्हें उसी विश्वास से देखा। इसी विश्वास ने उन्हें आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी।
उन्होंने अपनी सफलता में साथ देने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगियों का भी आभार जताया। कहा कि इन लोगों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और हर परिस्थिति में साथ डटे रहे।
लहुरिया दह की वृद्ध महिला का आशीर्वाद याद कर हुईं भावुक
दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट के अंत में लहुरिया दह की पहाड़ी की एक वृद्ध महिला से जुड़ी घटना को याद किया। उन्होंने बताया कि जब उस महिला ने अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचते देखा तो वह कुछ नहीं बोली। उसने सिर्फ कांपते हाथों से उनका सिर छूकर आशीर्वाद दिया।
उन्होंने अपनी सेवा यात्रा, देवरिया और मीरजापुर में मिले अनुभवों और आम लोगों से मिले स्नेह को याद करते हुए कहा कि पद भले छूट गया, लेकिन देश की मिट्टी से मिला सपना जीवन भर साथ रहेगा।