घाटियों और मैदानी इलाकों तक पहुंच सकता है मलबा
उन्होंने कहा कि नेपाल की ताजा घटना में बर्फ, चट्टान और मलबा खिसकने से नदी के रास्ते में अस्थायी रुकावट बनने और फिर अचानक भारी जलप्रवाह के संकेत मिले हैं। ऐसी रुकावट प्राकृतिक बांध का रूप ले सकती है। इसके टूटते ही पानी के साथ बोल्डर व मलबा तेज रफ्तार से नीचे की घाटियों और मैदानी इलाकों तक पहुंच सकता है।
उत्तराखंड में भी भूस्खलन से नदी रुकने और बाद में प्राकृतिक अवरोध टूटने की घटनाएं हो चुकी हैं। हालिया धराली हादसे ने भी दिखाया कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ढलान, ग्लेशियर और मलबे में हलचल अचानक विनाशकारी बहाव का रूप ले सकती है।
यूपी के निचले इलाकों तक असर डाल सकता है जलप्रवाह
प्रो. ठक्कर ने बताया कि ऐसी घटनाओं का असर केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं रहता। नेपाल की त्रिशूली नदी आगे नारायणी और फिर गंडक नदी प्रणाली से जुड़ती है। इसलिए वहां अचानक बढ़ा जलप्रवाह और मलबा यूपी के निचले इलाकों तक असर डाल सकता है।
भागीरथी और अलकनंदा गंगा प्रणाली का हिस्सा हैं, जबकि काली और उसकी सहायक नदियां शारदा नदी तंत्र से जुड़ती हैं। ऐसे में प्रदेश को स्थानीय बारिश के साथ हिमालयी गतिविधियों पर भी नजर रखनी होगी।