पूर्वांचल के सोनभद्र, चंदौली और मिर्जापुर जिले पनबिजली का गढ़ बनेंगे। यहां 3250 मेगावाट की तीन परियोजनाओं को अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है। इन परियोजनाओं में करीब 15 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। इससे जहां दस हजार लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं आसपास का इलाका विकसित होगा और बिजली संकट भी दूर होगा।
गुरुग्राम की कंपनी एसीएमई क्लीनटेक साल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड चंदौली और मिर्जापुर में पंप स्टोरेज पावर प्लांट लगाएगी। मिर्जापुर प्लांट का नाम अडवा प्रोजेक्ट रखा गया है। 900 मेगावाट क्षमता वाले इस प्लांट को लालगंज तहसील के सोनगढ़ा गांव में स्थापित किया जाएगा। चंदौली प्लांट का नाम मुखाखंड प्रोजेक्ट रखा गया है। 600 मेगावाट का ये प्लांट चकिया तहसील के मुबारकपुर गांव में लगेगा। दोनों परियोजनाओं में करीब 6561 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। दोनों प्लांट के लिए 671 हेक्टेयर जमीन का इस्तेमाल होगा। पूरी तरह से पर्यावरण फ्रेंडली परियोजना होगी।
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परियोजना मुख्य धारा में न होने से नदी के ईकोसिस्टम को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाएगा। कंपनी ने इस वर्ष तीन अप्रैल को राज्य सरकार के साथ ये समझौता किया था, जिसे सिर्फ तीन महीने में मंजूरी दे दी गई। ऐसे ही अहमदाबाद की कंपनी टोरेंट पावर लिमिटेड ने सोनभद्र में 1750 मेगावाट के पनबिजली प्रोजेक्ट के लिए 31 जनवरी को एमओयू किया था।
ये प्रोजेक्ट सासनाई गांव में लगाया जाएगा। इस परियोजना में जल की आपूर्ति सोन नदी से की जाएगी। प्रोजेक्ट में 375 हेक्टेयर भूमि ली जाएगी। दोनों कंपनियों के सीएसआर फंड से आसपास के इलाके को विकसित भी किया जाएगा।
यूं काम करता है पनबिजली संयंत्र
पंप स्टोरेज पावर प्लांट यानी पनबिजली सौर और पवन ऊर्जा से अलग विद्युत उत्पादन का स्रोत है। ये ईको फ्रेंडली है। पंप भंडारण सुविधाओं में खड़ी ढलान पर अलग-अलग ऊंचाई पर दो जल भंडार होते हैं। जब ग्रिड पर अतिरिक्त बिजली होती है और बिजली की मांग कम होती है, तब सस्ती बिजली का उपयोग प्रतिवर्ती टर्बाइनों को चलाकर निचले से ऊपरी जलाशय तक पानी पंप करने के लिए किया जाता है। बिजली की मांग बढ़ने और महंगी होने पर पानी को ऊपरी जलाशय से निचले जलाशय में ले जाकर बिजली पैदा की जाती है। इस सिस्टम से बिजली का उत्पादन उस समय होता है, जब मांग पीक पर होती है और बिजली महंगी होती है।