क्षेत्रीय पासपोर्ट दफ्तर में पासपोर्ट बुकलेट का अकाल पड़ गया है। इससे प्रदेश के 48 जिलों के आवेदकों के साधारण सेवा के तहत पासपोर्ट बनने पर ग्रहण लग गया है।
इस झंझट में अब तक करीब 10,000 आवेदक फंस चुके हैं। पासपोर्ट न पहुंचने से उनके आवेदकों ने क्षेत्रीय कार्यालय में दस्तक देने का सिलसिला शुरू कर दिया है।
अफसरों को तत्काल सेवा के आवेदकों की नाराजगी से बचने के लिए उधार की बुकलेट से पासपोर्ट बनाने का काम चलाना पड़ रहा है।
डिस्पैच होते थे 2200 पासपोर्ट
गौरतलब है कि लखनऊ, कानपुर, वाराणसी एवं गोरखपुर सेवा केंद्र पर साधारण एवं तत्काल सेवा के तहत होने वाले आवेदन की जांच कराकर लखनऊ के गोमतीनगर स्थित दफ्तर में पासपोर्ट बनाकर उसके डिस्पैच का कार्य होता है। इस दफ्तर से रोजाना 2200 साधारण एवं तत्काल सेवा के पासपोर्ट बनाकर डिस्पैच किये जाते हैं।
दो दिसंबर से पासपोर्ट बनाने की क्षमता 200 पर सिमट गई है। यानी दो दिसंबर से रोजाना 2000 आवेदकों के पासपोर्ट नहीं बने हैं।
बताया जाता कि पासपोर्ट बुकलेट की सप्लाई ठप होने यह संकट लखनऊ क्षेत्रीय दफ्तर में ं बरकरार है। केंद्र सरकार की एक प्रेस इन बुकलेट को छापने का कार्य करती है।
बनाने में छूट रहे पसीने
विभागीय सूत्र बताते कि तत्काल सेवा के पासपोर्ट को हफ्ते भर के भीतर बनाकर डिस्पैच करना अनिवार्य है, पर उनको बनाने में पसीना आ रहा है। ऐसे आवेदकों के पासपोर्ट नहीं पहुंच रहे हैं तो वे दफ्तर आपत्ति दर्ज कराने पहुंचने लगे हैं।
सूत्रों की माने तो लखनऊ ही नहीं अन्य क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी एक-दूसरे से पासपोर्ट बुकलेट उधार मांग रहे हैं।
लखनऊ में तो चार दिन से एक दूसरे राज्य से बुकलेट उधार लेकर तत्काल सेवा के पासपोर्ट बनाने का सिलसिला चल रहा। ये पासपोर्ट भी किसी दिन बनने बंद हो जाएंगे।