जल निगम की निर्माण इकाई कंस्ट्रक्शंस एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) की ओर से कराए जा रहे कामों में 50 फीसदी से ज्यादा तक की कमीशनखोरी हो रही है। इसका खुलासा लोकायुक्त द्वारा संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में कराए गए बिजली के काम को लेकर की गई शिकायत की जांच में हुआ है।
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मायावती सरकार में एसजीपीजीआई में बिजली के एलटी व एचटी केबल बदलने का काम तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री लालजी वर्मा के आदेश पर सीएंडडीएस को सौंपा गया था। 16.25 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए काम में 8.18 करोड़ रुपये से ज्यादा कमीशन में चले गए।
लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व मुख्य सचिव आलोक रंजन को रिपोर्ट भेजकर कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस व उसके महाप्रबंधक व मुख्य अभियंता एनपी सिंह से 8.18 करोड़ रुपये की वसूली करने तथा एनपी सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करके मुकदमा चलाने की सिफारिश की है। लोकायुक्त ने सिफारिशों पर कार्रवाई करके तीन महीने में अवगत कराने को कहा है।
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एक व्यक्ति दोषी, बाकी को मिली क्लीन चिट
राजधानी के एमसी श्रीवास्तव ने लोकायुक्त से एसजीपीजीआई में सीएंडडीएस की ओर से कराए गए बिजली के काम में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी की शिकायत की थी। उन्होंने एसजीपीजीआई के निदेशक आरके शर्मा, अपर निदेशक डॉ. अरिंदम भट्टाचार्य, आईएएस अधिकारी हरभजन सिंह, बीएस भुल्लर, एसपी सिंह, पीजीआई के अधीक्षण अभियंता प्रदीप झा, अधिशासी अभियंता एके सिंह, सीएंडडीएस के जीएम व मुख्य अभियंता एनपी सिंह व कामाख्या इंटरप्राइजेज के प्रोप्राइटर प्रशांत सिंह पर विभिन्न आरोप लगाए थे।
लोकायुक्त ने अपनी जांच में केवल एनपी सिंह को दोषी पाया है। बाकी सभी को क्लीन चिट दे दी गई। लोकायुक्त की जांच में खुलासा हुआ कि एनपी सिंह ने बिना विधिवत टेंडर प्रक्रिया अपनाए ही एचटी कार्य के लिए ठेकेदार को 7 करोड़ 1 लाख 65 हजार रुपये तथा एलटी कार्य के लिए 9 करोड़ 23 लाख 61 हजार रुपये का भुगतान कर दिया।
लोक निर्माण विभाग, राजकीय निर्माण निगम, पावर कॉर्पोरेशन और केबल निर्माता कंपनियों से पूछताछ और गहन जांच के बाद लोकायुक्त ने निष्कर्ष निकाला है कि एचटी केबल कार्य में 53 फीसदी तथा एलटी केबल कार्य में 51 फीसदी ज्यादा भुगतान किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार एनपी सिंह ने एचटी केबल के लिए 3 करोड़ 62 लाख 60 हजार रुपये तथा एलटी कार्य के लिए 4 करोड़ 55 लाख 96 हजार रुपये का अनुचित लाभ स्वयं और ठेकेदार जेबी टेस्ट एंड कमीशनिंग को पहुंचाया।
हर स्तर पर नियमों की अनदेखी
रिपोर्ट के अनुसार एसजीपीजीआई में बिजली व्यवस्था के उच्चीकरण व सुदृढ़ीकरण के लिए अगस्त 2010 में 35 करोड़ 40 लाख 22 हजार रुपये का बजट मंजूर हुआ था।
तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री लालजी वर्मा ने 6 अप्रैल 2010 को अन्य सरकारी निगमों से तुलना किए बगैर ही सीएंडडीएस को कार्यदायी संस्था नामित कर दिया। संस्था द्वारा कार्य के लिए तैयार कराए गए एस्टीमेट में एचटी व एलटी केबल खरीदने की दरें पीडब्ल्यूडी द्वारा अनुमोदित दर सूची और केबल निर्माता कंपनी हैवेल्स की मूल्य सूची से ज्यादा दर्शाई गई।
एस्टीमेट का परीक्षण न तो पीडब्ल्यूडी ने किया और न ही एसजीपीजीआई, चिकित्सा शिक्षा विभाग और शासन के प्रयोजना रचना एवं मूल्यांकन प्रभाग ने।
निर्माता कंपनियों की ओर से मूल्य सूची की दरों में दी जा रही 50 प्रतिशत से ज्यादा छूट पर विचार ही नहीं किया गया। यही नहीं, एनपी सिंह ने हैवेल्स इंडिया के जो कोटेशन व वर्क ऑर्डर दाखिल किए थे, वे भी फर्जी पाए गए।
-एनपी सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम व आईपीसी के तहत मामला दर्ज करके मुकदमा चलाया जाए। -कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस व एनपी सिंह से 8 करोड़ 18 लाख 57 हजार रुपये की वसूली की जाए।
-चिकित्सा शिक्षा विभाग सीएंडडीएस के मुख्य अभियंता को निर्देश दे कि 2010 से एसजीपीजीआई में शुरू हुए केबल कार्य को पूरा कराकर स्वीकृत बजट का पूरा हिसाब दाखिल करें और शेष रकम राजकोष में शीघ्र जमा करें।
-शासन की वित्त व्यय समिति कार्यदायी संस्थाओं द्वारा कराए जाने वाले कार्यों के लिए बिजली के सामानों की खरीद के लिए आवंटित किए जाने वाले बजट का आकलन करने से पहले निर्माता कंपनियों की मूल्य सूची और उसके द्वारा दी जाने वाली छूट तथा पीडब्ल्यूडी की अनुमोदित दरों को ध्यान में रखते हुए बजट स्वीकृ त करने के संबंध में कोई कार्यवाही करे।
-कार्यदायी संस्थाओं के चयन के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए। -ठेकों के आवंटन में केंद्रीय सतर्कता आयोग के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जाए। -प्रतियोगितात्मक दरों पर ही विभागों के कार्य आवंटित किए जाएं।