केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने तो गोवा में चेंजिंग रूम में लगे कैमरे को पकड़ लिया लेकिन बहुत संभव है कि हर कोई ऐसा न कर पाए। वजह है कि आज मार्केट में उपलब्ध दर्जनों किस्म के स्पाई कैमरा और ऐसे शीशे जो पारदर्शी है।
हर किसी के लिए इन्हें पकड़ पाना आसान नहीं है, लेकिन थोड़ी सजगता से चेंजिंग रूम पर नजर डाली जाए तो ये छुपे भी नहीं रह सकते।
राजधानी के दर्जनों मॉल में सैकड़ों रेडिमेड गारमेंट आउटलेट चेंज रूम सुविधा देती हैं। शॉपिंग के दौरान ट्रायल रूम का उपयोग लगभग सभी करते हैं।
लेकिन इनमें कैमरा हो सकता है, यह लगातार देश भर में सामने आई घटनाओं से साबित हो चुकी हैं।
पब्लिक टॉयलेट में भी रहें सावधान
इन्हें भांपने के लिए स्पाई कैमरा की मौजूदगी की संभावना और दो शीशों के बीच फर्क समझना जरूरी है। अक्सर पब्लिक टॉयलेट में भी ये लगाए जा सकते हैं।
महिलाओं को इनसे ज्यादा खतरा है क्योंकि इनके वीडियो बनाकर इंटरनेट पर अपलोड किए जा सकते हैं या सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा सकते हैं।
साइबर मामलों के युवा जानकार नितनेम सिंह बताते हैं कि मार्केट में ऐसे मिरर उपलब्ध हैं जो डबल हैं या पारदर्शी हैं।
ये दूसरी ओर बैठे व्यक्ति को आरपार दिखाते हैं, भले एक ओर का व्यक्ति दूसरी ओर न देख पाए। इनसे रिकॉर्डिंग भी की जा सकती है।
सिंह बताते हैं कि चेंज रूम में या टॉयलेट में ऐसा मिरर पहचानने का सबसे अच्छा तरीका है कि इनमें अपने प्रतिबिंब पर गौर करें।
ऐसे करें जांच
सामान्य मिरर में आप अपनी छवि स्पष्ट होगी जबकि शीशे के पास जाकर दूसरी ओर देखें, यदि पीछे दूसरा शीशा लगा होगा तो चेहरे समेत शरीर में हल्का सा बदलाव दिखेगा।
क्योंकि दो शीशे होने के चलते रिफ्लेक्शन होता है। ऐसा हो तो समझ लें कि शीशे के पीछे एक ओर शीशा लगा हुआ है, जिसके पीछे आपको कोई देख रहा है।
जबकि यदि शीशे के सामने उंगली रखने से दोनों के बीच थोड़ा सा भी अंतर दिखे तो समझ लें कि यहां कोई दूसरा शीशा नहीं है।
यदि ट्रायल रूम में कैमरा लगा होगा तो आपके मोबाइल फोन में बात करते समय आवाज खराब आ सकती है या नेटवर्क की समस्या आ सकती है।
क्योंकि छुपे कैमरे के तार, उसी ट्रायल रूम में चारों ओर लगे होते हैं जिससे कि मोबाइल बाहर का सिग्नल नहीं ले पाता है।
ऐसे में ट्रायल रूम में अपना मोबाइल जरूर लेकर जाएं।
मोबाइल टार्च प्रयोग करें
मोबाइल का टार्च ऑन करें, यदि आपको सामने से रोशनी रिफलेक्ट करती हुई दिखे तो समझ लें खतरा है। जबकि सामान्य शीशे में रोशनी ही दिखेगी।
वहीं स्पाई कैमरा जैसे गजेट्स के कारोबारी सतीश कुमार सक्सेना ने बताया कि हाल के दिनों में लखनऊ में स्पाई कैम की मांग बढ़ी है।
किसी पैन के ढक्कन जितने छोटे आकार में भी मिल रहे हैं। वहीं नितनेम कहते हैं कि छोटे आकार की वजह से इन्हें आसानी से छिपाया जा सकता है, इनमें 2 से 8 जीबी का डाटा रिकॉर्ड होता है यानी बैटरी फुल होने पर ये 3-4 घंटे लगातार रिकॉर्डिंग करते हैं।
वे सुझाव देते हैं कि चेंज रूम की में कोई भी ऐसी चीज नहीं होनी चाहिए जो वहां के लिए अनोखी हो।
जैसे घड़ी लगी हो या हैंगर के बीच कोई बड़ा प्लग लगा हो। इनमें कैमरा लगा हो सकता है। साथ ही चेंज रूम के किनारों और वहां लगे जोड़ों की जरूर पड़ताल करें, इनमें भी कैमरा छुपाया गया हो सकता है।