अर्जन विभाग की सुस्ती और भू-माफिया के बढ़ते दबाव के बीच 40 हजार लोगों को आशियाना देने की एक अच्छी योजना लैप्स होने के कगार पर है।
मोहान रोड पर 668 एकड़ भूमि का अर्जन किया जाना है, पर इससे पहले किसानों को मुआवजा दिया जाना है।
इसके बाद यहां भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। माना जा रहा है कि अगले कुछ महीने में अगर मुआवजा नहीं दिया गया तो योजना खत्म हो जाएगी।
लैंड बैंक के लिए तरस रहे एलडीए के लिए यह एक बड़ा खतरा होगा। प्राधिकरण को मोहान रोड आवासीय स्कीम से बहुत उम्मीद है, मगर अर्जन विभाग की लापरवाही से अब तक इस योजना में किसानों का मुआवजा तय नहीं हो पा रहा है।
जानें अर्जन विभाग को मिला ये आदेश
उपाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार सिंह ने अर्जन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस दिशा में तेजी से काम किया जाए, ताकि योजना लैप्स न हो।
मोहान रोड आवासीय योजना के लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया अब खासी धीमी होती नजर आ रही है। यहां धारा-4 और 6 तामील की जा चुकी है।
प्यारेपुर और कलियाखेड़ा गांव के किसानों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। यहां करीब 1600 किसानों की जमीन प्राधिकरण लेगा। इसके लिए उनसे समझौता कर अपना मुआवजा तय कराने की अपील की जिला प्रशासन और प्राधिकरण कर रहा है।
खत्म हो चुकी है योजना की डेडलाइन
सबकुछ दिसंबर-2013 में तय हो गया था। मुआवजा तय कर के किसानों को वितरण अब तक शुरू किया जाना था।
पहले तो एक जनवरी-2014 को देश में लागू किए गए भूमि अर्जन कानून के तहत प्रदेश सरकार की पॉलिसी न बनने से मुआवजा नहीं तय हो पा रहा था।
इसके बाद अब किसानों का सर्वे पूरा न हो पाने की वजह से इस योजना के लैप्स होने की आशंका पैदा हो गई।
इस योजना के लिए डेडलाइन दिसंबर-2015 में खत्म हो जाएगी। अगले कुछ महीने में मुआवजे का मसला फाइनल नहीं हो सका तो इस योजना का लैप्स होना तय है। जिसके बाद में पूरी स्कीम भूमाफिया के हवाले हो जाएगी।