ऐसे होती है हाउस टैक्स की गणना
नगर निगम में एरिया के हिसाब से हाउस टैक्स निर्धारण की दरें तय हैं। ये दरें (कच्चे मकान व प्लॉट को छोड़कर) प्रति वर्ग फीट के हिसाब से 1.25 रुपये से 2.50 रुपये तक हैं। टैक्स निर्धारण करने के लिए मकान के एरिया को पहले टैक्स रेट पर उसे 12 महीने से गुणा कर देते हैं।
जो परिणाम आता है, वह उस मकान का वार्षिक किराया मूल्यांकन (एआरवी) हो जाता है। जो वार्षिक किराया मूल्यांकन बनता है, उसका 15 प्रतिशत हाउस टैक्स होता है। टैक्स गणना को लेकर मकान के क्षेत्रफल में बालकनी, किचन, बाथरूम, कॉरिडोर, स्टोर, पोर्टिको के एरिया में छूट भी दी जाती है। इसके साथ ही मकान जितना पुराना होता है, उस आधार पर एआरवी में छूट दी जाती है।
गृहकर की दरें इलाके के हिसाब से तय की जाती हैं। किसी का मकान हजरतगंज में तो उस इलाके में गृहकर की दर अधिक है। वहीं उतनी ही चौड़ी रोड पर किसी का घर तेलीबाग, फैजुल्लागंज या शहीद भगत सिंह वार्ड की कॉलोनी में तो उसकी गृहकर दरें कम है।
जलकल विभाग की ओर से अभी शहर में वाटर मीटर नहीं लगाए गए हैं और न ही वाटर टैक्स वसूली को लेकर खर्च के आधार पर दरें लागू हैं। अभी वाटर टैक्स की गणना नगर निगम द्वारा लगाए जाने वाले गृहकर के आधार की जाती है।
हाउस टैक्स के लिए जो एआरवी (एनुअल रेंटल वैल्यू) निकाली जाती है उसी पर जलकल विभाग 12.5 प्रतिशत की दर से वाटर टैक्स लेता है। इसमें पानी के उपयोग को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं है। ऐसे में जब हाउस टैक्स की दरें बढ़ेंगी तो मकानों की एआरवी बढ़ेगी और उससे वाटर टैक्स भी बढ़ जाएगा।