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5 से 20 हजार तक में बिकते हैं मरीज, अस्पतालों के आसपास फैला है दलालों का जाल, यूं होता है सौदा

Mon, 10 Feb 2020 04:01 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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लखनऊ के चिकित्सा संस्थानों में आने वाले मरीजों पर निजी अस्पताल संचालकों की नजरें लगी रहती हैं। इमरजेंसी आने वाले मरीज को निजी अस्पताल भेजने का सौदा पांच हजार से 20 हजार रुपये तक में होता है। गेट से मरीज को खिसकाने वाले कर्मचारी को तत्काल एक हजार रुपया मिल जाता है।
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कुछ चिकित्सक तो इलाज पर होने वाले कुछ खर्च का 30 फीसदी लेते हैं। अमर उजाला ने रविवार को मरीजों की खरीद के खेल की पड़ताल की तो स्थितियां चौंकाने वाली मिलीं। केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के बाहर मौजूद एंबुलेंस चालकों से बात की गई। खुद को निजी अस्पताल का संचालक बताकर मरीज ले आने का लालच देने पर एंबुलेंस चालकों ने बताया कि ट्रॉमा से निजी अस्पताल मरीज पहुंचाने की एवज में चालक को एक हजार रुपये मिलते हैं।

एंबुलेंस चालकों ने यह भी बताया कि मरीज के तीमारदार डॉक्टर की बात आसानी से समझता है। जिस अस्पताल का नाम डॉक्टर ले लेता है, वहां जाने के लिए वह तैयार हो जाता है। ऐसे में डॉक्टर पांच हजार रुपया तत्काल लेता है। मरीज का इलाज लंबा चलता है और उसके तीमारदार देने की हैसियत में हैं तो यह भाव 20 हजार तक पहुंच जाता है।
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सीजन के हिसाब से घटता-बढ़ता है भाव

सूत्रों का कहना है कि निजी अस्पताल संचालकों की पहुंच कर्मचारी से लेकर डॉक्टर तक से होती है। वे इस बात पर भी निगाह रखते हैं कि संबंधित सीजन में किस विभाग में ज्यादा मरीज आ रहे हैं। उसी हिसाब से रेजीडेंटों पर चारा डालते हैं। संबंधित विभाग के नर्सिंग स्टाफ व अन्य कर्मचारी निजी अस्पताल संचालक व रेजीडेंट के बीच धुरी का काम करते हैं।

दिखाते हैं वेंटिलेटर का डर
सूत्रों का कहना है दलाल तीमारदारों को यह कहकर डराते हैं कि वेंटिलेटर के बगैर मरीज चंद घंटों का मेहमान है। यह भी बताते हैं कि केजीएमयू, लोहिया व पीजीआई में वेंटिलेटर नहीं मिलेगा। कई डॉक्टर ऐसे भी हैं, जो अस्पताल का नाम बताने के बाद साथ जाने वाले कर्मचारी का नाम भी बता देते हैं।

10 कर्मचारियों पर निगाह
केजीएमयू से निजी अस्पताल भेजने वाले रेजीडेंट डॉक्टर को निलंबित करने के बाद उसे बर्खास्त करने की तैयारी है। पूरे खेल का खुलासा होने के बाद केजीएमयू प्रशासन ने वर्षों से नाइट ड्यॅटी करने वाले ट्रॉमा सेंटर के 10 कर्मचारियों को रडार पर रखा है। शक है कि नाइट ड्यूटी में ये मरीजों को निजी अस्पताल भेजते हैं।
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बना गोपनीय दस्ता

ट्रॉमा सेंटर से निजी अस्पताल मरीज भेजने के खेल का खुलासा होने के बाद प्रति कुलपित प्रो. जीपी सिंह ने गोपनीय दस्ता बनाने का सुझाव दिया है। सोमवार को कुलपति के साथ ट्रॉमा के विभिन्न विभागाध्यक्षों की बैठक होगी। प्रो. जीपी सिंह ने बताया कि इस काम में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। निगरानी  के लिए अलग टीम बनाई जा रही है। यह टीम गोपनीय होगी। यह वीसी को रिपोर्ट देगी।

लोहिया संस्थान, पीजीआई का भी बुरा हाल
लोहिया संस्थान में भी निजी अस्पताल के डॉक्टर के आने का मामला इस कदर बढ़ा कि एक ही विभाग के दो डॉक्टरों ने एक-दूसरे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। निजी अस्पताल में मरीज भर्ती कराने वाला गिरोह पीजीआई इमरजेंसी के आसपास भी मंडराता रहता है। सूत्रों का कहना है कि कई बार सुरक्षाकर्मी इन्हें खदेड़ चुके हैं।

अब औचक जांच की जाएगी
ट्रॉमा के बाहर से एंबुलेंस चालकों और दुकानदारों को कई बार खदेड़ा जा चुका है। पुलिस इन्हें हटवाती है और ये फिर आ जाते हैं। ट्रॉमा के डॉक्टरों व कर्मचारियों को चेतावनी दी जा चुकी है। अब अचानक जांच किया जाएगा। जो पकड़ा जाएगा, उस पर कार्रवाई होगी। -डॉ. आरएएस कुशवाहा, चीफ प्राक्टर, केजीएमयू
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