लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और ढिलाई के चलते बिना पंजीकरण निजी अस्पताल मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय विभाग ने उन्हें संचालन की छूट दे रखी है। स्वास्थ्य विभाग ने जिन अस्पतालों को कुछ दिन पहले बंद कराने का दावा किया था, उनकी जमीनी पड़ताल में सच्चाई बिल्कुल उलट निकली। बंद बताए गए अस्पताल खुलेआम चल रहे हैं और मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।
मां वैष्णो हॉस्पिटल, बुद्धेश्वर
रिपोर्टर : हरदोई जिला अस्पताल से एंबुलेंस वाला बोल रहा हूं।
संचालक : हां बताओ, क्या हुआ।
रिपोर्टर - एक मरीज है आईसीयू का, ले आऊं?
संचालक : हां ले आओ, अभी कहां हो?
रिपोर्टर : मरीज को एंबुलेंस में लिटाया है, ऑक्सीजन पर है।
संचालक : कितने समय में लखनऊ पहुंचोगे?
रिपोर्टर : करीब एक से डेढ़ घंटे में।
संचालक : ठीक है, ले आओ… लखनऊ पहुंचकर फोन कर देना।
रिपोर्टर : अस्पताल का नाम मां वैष्णो अस्पताल है या मां वैष्णो हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर?
संचालक : मां वैष्णो हॉस्पिटल, बुद्धेश्वर में है।
रिपोर्टर : वहां किससे मिलना होगा?
संचालक : अस्पताल पहुंचो, नंबर दे देंगे… कोई न कोई मिल जाएगा।
करीब दस मिनट बाद खुद अस्पताल से फोन आया।
अस्पताल स्टाफ : मां वैष्णो हॉस्पिटल से बोल रहे हैं, मरीज लेकर कहां पहुंचे?
रिपोर्टर : हरदोई जिला अस्पताल से करीब दस किलोमीटर आगे हैं।
स्टाफ : दुबग्गा पहुंचकर इसी नंबर पर फोन कर देना।
रिपोर्टर : मरीज के बदले कुछ मिल जाएगा हमें?
स्टाफ : हां, ले आओ… मिल जाएगा, परेशान मत हो।
यानी मरीजों की जिंदगी से खेलते हुए यहां कमीशन का पूरा खेल भी खुलकर चल रहा है।
इम्पल्स हॉस्पिटल का भी यही हाल
बिना पंजीकरण मिले ठाकुरगंज के बालागंज स्थित इम्पल्स हॉस्पिटल को भी सीएमओ की टीम ने बंद करने का दावा किया था, लेकिन हकीकत यह है कि कॉम्प्लेक्स के पहले तल पर भले ही ताला लगा मिला, मगर भूतल पर अस्पताल का गेट खुला था और स्टाफ भी मौजूद मिला।
यह है पूरा मामला
नर्सिंग होम के नोडल अधिकारी डॉ. एपी सिंह और चिकित्साधिकारी डॉ. संदीप सिंह की टीम ने 17 फरवरी को दुबग्गा क्षेत्र के 10 अस्पतालों पर छापा मारा था। जांच में मां वैष्णो हॉस्पिटल और इम्पल्स हॉस्पिटल बिना लाइसेंस संचालित मिले थे। बाकी आठ अस्पतालों में एमबीबीएस डॉक्टर नहीं थे और कई जरूरी मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस थमा दिए गए। दो अस्पतालों को बंद करने का दावा किया गया, जबकि बाकी आठ को दोबारा नोटिस देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
Iजिन दो अस्पतालों का पंजीकरण नहीं मिला था, उनके संचालन पर रोक लगाई गई थी। अगर इसके बावजूद वे मरीज भर्ती कर रहे हैं तो संबंधित थाने को पत्र भेजकर कार्रवाई कराई जाएगी। बाकी आठ अस्पतालों को दोबारा नोटिस दिया गया है और संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनके संचालन पर रोक लगाई जाएगी।I
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- डॉ. एपी सिंह, नर्सिंग होम के नोडल अधिकारीI