लखनऊ। लखनऊ में इस समय 36 हजार लोग होम आइसोलेशन में हैं। कोविड कंट्रोल रूम इन मरीजों के लगातार संपर्क में होने का दावा कर रहा है। लेकिन हकीकत ये है कि कई मरीजों के पास न तो कंट्रोल रूम से फोन आ रहा है न उन्हें दवाएं ही भेजी जा रही हैं। इससे मरीजों की हालत गंभीर हो रही है।
होम आइसोलेशन के मरीजों की मदद के लिए कागजी व्यवस्थाएं तो बहुत हैं, लेकिन धरातल की तस्वीर एकदम अलग है। दवाओं की किट तो दूर उन्हें कोविड कंट्रोल रूम से फोन तक नहीं किया जा रहा है। होम आइसोलेशन वाले मरीजों को दवाओं की किट दी जानी है। इसका प्रचार-प्रसार तो बड़े शोर शराबे से हुआ, लेकिन सुविधा देने के मामले में लापरवाही ही सामने दिख रही है। कुछ मरीजों को फीवर क्लीनिक से दो या तीन दवाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा मरीज मेडिकल स्टोर जाकर दवाएं खरीद रहे हैं। ऐसे में इन मरीजों से दूसरों को भी संक्रमण की आशंका है। अभी कुछ दिन पहले फ्लिपकार्ट से दवाएं पहुंचाने की शुरुआत की गई, लेकिन उसका भी विशेष फायदा नहीं दिख रहा है।
परिचित डॉक्टर से ले रहे सलाह
त्रिवेणी नगर निवासी नवीन सिंह पिछले एक सप्ताह से कोरोना पॉजिटिव हैं। वह होम आइसोलेशन में हैं, लेकिन अभी तक उनके पास कंट्रोल रूम से न तो काल आई है और न दवाएं भेजी गई हैं। ऐसे में वह अपने एक परिचित डॉक्टर से फोन पर सलाह लेकर दवाएं ले रहे हैं।
न किट मिली न फोन आया
नक्खास निवासी विपिन गुप्ता के पिता की 15 दिन पहले कोरोना से मौत हो चुकी है। होम आइसोलेशन के दौरान उनको शुरुआत में बेड नहीं मिला। जब तक बेड मिलता तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पिता की मौत के बाद विपिन भी संक्रमित हैं, लेकिन उनको अभी तक न तो दवा की किट मिली है न कोई फोन आया है।
निजी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा
चौपटिया निवासी सुधीर जैन 10 दिन से होम आइसोलेशन में हैं। उन्हें भी अब तक न फोन आया है न दवाएं ही भेजी गई हैं। यही नहीं ऑक्सीजन लेवल 35 तक गिर जाने पर उनकी हालत बहुत खराब हो गई तो कंट्रोल रूम फोन किया, फिर भी मदद नहीं मिली। ऐसे में निजी अस्पताल में भर्ती हुए तो जान बची।
मरीजों की संख्या ज्यादा
सीएमओ डॉ. संजय भटनागर का कहना है कि मरीजों की संख्या ज्यादा है। इसके बावजूद सभी से संपर्क किया जा रहा है। सभी को दवाएं भी दी जा रही हैं। इसके बावजूद यदि किसी को दवाएं नहीं मिल पाई हैं तो इसे देखा जाएगा।