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Lucknow News: हंसी के ठहाकों में घुला होली का रंग, कविताओं से गूंजा निराला सभागार

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निराला सभागार में काव्य पाठ करते विजय तन्हा।
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लखनऊ। होली के रंग, ठहाकों की गूंज और कविताओं की मिठास... कुछ ऐसा ही माहौल बुधवार को उप्र हिंदी संस्थान के निराला सभागार में देखने को मिला, जब यहां आयोजित हास्य कवि सम्मेलन ने श्रोताओं को हंसी से लोटपोट कर दिया।
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हास्य कवि चेतराम अज्ञानी ने जैसे ही मंच से कहा... ''हास्य व्यंग्य मैं लिखता हूं, ये मेरी मजबूरी है, स्वास्थ्य सही चाहो तो हंसना बहुत जरूरी है...' सभागार तालियों से गूंज उठा। उनकी रचनाओं ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
हास्य कवि गोबर गणेश ने अपने व्यंग्य में कहा... 'गिरगिट तो रंग बदलता है, पर मानव रंग बदलने में गिरगिट से महान हो गया।' इस पंक्ति पर भी श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं।
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सरदार पटेल सामाजिक, साहित्यिक उत्थान संगठन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में होली मिलन के साथ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह भी हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि रविंदर सिंह पटेल, प्रदेश अध्यक्ष युवा राष्ट्रीय लोकदल और विशेष अतिथि नीलम गंगवार, अध्यक्ष शांति सेवा फाउंडेशन ने दीप प्रज्वलित कर किया। बरेली से आईं गजलकार पूनम गंगवार ने वाणी वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता इलाहाबाद के हास्य कवि डीसी पांडे ने की, जबकि संचालन बाराबंकी के हास्य कवि अजय प्रधान ने किया।
कवयित्री डॉ. अलका अस्थाना ‘अमृतमयी’ ने ''कान्हा रंग न डारो हमि पे'' सुनाकर वाहवाही बटोरी, जबकि डॉ. सरिता सदाबहार ने ''सरिता कभी दर्द बोना नहीं जानती'' सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया। गीतकार डॉ. रेनू द्विवेदी, विजय तन्हा और पूनम गंगवार ने भी अपनी रचनाओं से समा बांध दिया। अंत में तहसील पत्रकार एसोसिएशन बीसलपुर के अध्यक्ष पातीराम गंगवार ने सभी कवियों को सम्मानित किया।
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