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पहले भी टूटा है जनता परिवार, जानिए कब-कब मिले और अलग हुए

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राजनीति में जनता परिवार की एकजुटता और टूटने पर विरोधी दल यह कहकर खिल्ली उड़ाते हैं कि यूपीएससी की परीक्षाओं में यह प्रश्न पूछा जाना चाहिए कि जनता दल परिवार कितनी बार टूटा।
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इस कटाक्ष के पीछे वाकई हकीकत छिपी हुई है। आजादी के बाद जनता परिवार के सभी दल अलग-अलग स्थितियों में पास तो आए लेकिन लंबे समय तक साथ रह नहीं सके। एक टूट हुई फिर उसी पार्टी से कई टूट होती गईं।

देश में पहली बार जनता परिवार इंदिरा गांधी के खिलाफ एकजुट हुआ। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति के नारे के साथ जनता दल एक ऐसी राजनीतिक पार्टी के रूप में सामने आया जिसे लोगों ने कांग्रेस के विकल्प के तौर पर लिया।
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यह इनकी एकजुटता ही थी कि मजबूत दिखने वाली इंदिरा सत्ता से बाहर हो गईं। यह देश के पहली गैर कांग्रेसी सरकार थी। लेकिन जनता परिवार का यह एका बहुत दिनों तक चल नहीं सका।

जनता परिवार के बड़े नेता चौधरी चरण से इस परिवार से निकलकर पार्टी बना ली और कांग्रेस की मदद से 40 दिन के प्रधानमंत्री भी बने। जनता दल की टूट का सिलसिला एक बार चला तो भी चलता ही गया...

वीपी सिंह की अगुवाई में फिर करीब आए

पूरा जनता परिवार फिर एक बार ‌1988 में करीब आया। 11 अक्टूबर 1988 को वीपी सिंह की अगुवाई में जनता दल की बुनियाद पड़ी।  जनता पार्टी, जनमोर्चा और लोकदल का जनता दल में विलय हो गया। लेकिन यह साथ फिर से नहीं चल पाए।

इसी सरकार से अलग होकर चंद्रशेखर ने जनता दल समाजवादी का गठन किया। चौधरी चरण सिंह की तर्ज पर कांग्रेस के समर्थन से वो प्रधानमंत्री भी बने। बाद में चन्द्रशेखर की इस पार्टी का नाम समाजवादी जनता पार्टी हो गया।

जनता दल से अलग हुए चंद्रशेखर और मुलायम सिंह यादव में भी फूट पड़ गई। 1992 में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी जनता पार्टी से अलग होकर समाजवादी पार्टी का गठन कर लिया। 1992 में चौधरी अजीत सिंह ने भी जनता दल से अलग होकर आरएलडी नामकी नई पार्टी बना ली। ये जनता दल की एक और बड़ी टूट थी।

यह टूट बढ़ती ही गई। जनता दल के इस कुनबे से 1994 में जॉर्ज फर्नांडीज और नीतीश कुमार ने अलग होकर समता पार्टी की बुनियाद रखी। इसके बाद 1996 में कर्नाटक के नेता रामकृष्ण हेगड़े भी जनता दल से अलग हो गए, उन्होंने लोकशक्ति नामक नई पार्टी का गठन कर लिया।

1997 में लालू यादव ने जनता दल से अलग होकर आरजेडी का गठन किया। 1998 में नवीन पटनायक जनता दल से अलग हो गए। ओडिशा में बीजेडी का गठन हुआ। ये जनता दल की छठी बड़ी टूट थी। आप ऊपर पढ़ ही चुके हैं कि ये पहले पांच बार टूट चुके थे।

टूटती ही रहा जनता परिवार

1999 में बचे-खुचे जनता दल के भी दो हिस्से बन गए। देवेगौड़ा की अगुवाई में जनता दल सेक्युलर और शरद यादव की अगुवाई में जनता दल यूनाइटेड। इस टूट के साथ जनता दल अपने परिवार का मतलब हमेशा के लिए खो चुका था।

ऐसा नहीं कि इतनी पार्टियां बन जाने के बाद टूट होनी बंद हो गई थी। रामविलास पासवान ने जेडीयू से अलग निकलकर लोकजनशक्ति पार्टी का गठन कर लिया। यह वह दौर था जब केंद्र में भाजपा मजबूत होने लगी थी और कुछ जनता परिवार से अलग हुईं कई पार्टियां एनडीए का हिस्सा बन रहीं थीं।

हालांकि इसी समय कुछ टूटी पार्टियां एकजुट भी होने लगी थीं। जॉर्ज फर्नांडीज और नीतीश कुमार की अगुवाई वाले समता पार्टी का विलय शरद यादव की अगुवाई वाली जेडीयू में हो गया।
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और फिर हुई एकजुट होने की बड़ी कोशिश

2014 के चुनावों में जब मोदी लहर के सामने सभी कई पार्टियां अपना वजूद लगभग खो चुकी थीं उसी समय जनता परिवार के बिखरे दलों ने एक साथ आने की फिर से चेष्टा की।

भारत की छह राजनीतिक पार्टियों ने मिलकर एक नया दल बनाने का फ़ैसला कर लिया है। यह सभी राजनीतिक पार्टियां कभी न कभी एक ही पार्टी जनता दल का हिस्सा रह चुकी थीं।

जनता परिवार के इस विलय का ऐलान दिल्ली में जवता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने किया ‌था। उन्होंने ये घोषणा भी की कि इस नए दल के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव होंगे। विलय में यह भी कहा गया था कि यह सभी पार्टियां अपना चुनाव निशान खत्म करके एक चुनाव चिहन के सा‌थ चुनाव में उतरेंगी।

जिन छह पार्टियों का विलय हुआ उनमें जनता दल (यू), समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय राष्ट्रीय लोकदल, जनता दल (सेक्यूलर), समाजवादी जनता पार्टी थी।

3 सितंबर को जब समाजवादी पार्टी ने बिहार में अकेले चुनाव लड़ने की बात कही तो इसके साथ यह साफ हो गया कि कुद महीने पहले ही कई एकजुटता सैद्घांतिक तौर पर खत्म हो गई।

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