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आजम की मनमानी पर हाईकोर्ट ने उठाया सवाल!

Thu, 25 Sep 2014 09:55 PM IST
मोहित त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
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रामपुर के मौलाना अली मोहम्मद जौहर विवि के चांसलर बनाए जाने पर हाईकोर्ट ने कैबिनेट मंत्री आजम खां से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ कोर्ट ने आजम को नोटिस जारी कर पूछा है कि वे बताएं कि कैबिनेट मंत्री रहते हुए कुलाधिपति कैसे बन गए।
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साथ ही यह भी बताएं कि उन्होंने राज्य सरकार या विवि से कोई सुविधा ली या नहीं। कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी कर छह हफ्ते में जवाब देने को कहा है। वहीं, उनके खिलाफ ‘हेट स्पीच’ मामले में कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति अरविंद कुमार त्रिपाठी की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को यह आदेश रजा हुसैन व एस आमिर हैदर रिजवी की याचिका पर दिया। इसमें राज्य सरकार समेत आजम खां को पक्षकार बनाया गया है।
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याचियों का आरोप है कि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खां को जौहर विश्वविद्यालय का कुलाधिपति (चांसलर) बनाया जाना लाभ के पद संबंधी कानून का उल्लंघन और कानून की मंशा के खिलाफ है। कोर्ट ने याचियों को भी प्रति उत्तर दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का वक्त दिया है। मामले की अगली सुनवाई दो माह बाद होगी।

राज्य सरकार की दलील

राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल के साथ सरकारी वकील अनुपमा सिंह ने दलील दी कि चांसलर का पद लाभ के पद के दायरे में नहीं आता है और आजम खां कुलाधिपति के रूप में दुहरी सुविधाएं नहीं ले रहें हैं। जिस पर अदालत ने कहा कि अदालत ने कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि कैबिनेट मंत्री को नोटिस जारी किया जाना चाहिए, क्योंकि वही यह पक्ष पेश कर सकते हैं कि उन्होंने राज्य सरकार या फिर विश्वविद्यालय से कोई सहूलियत ली है या नहीं।

‘हेट स्पीच’ मामले में राहत, याचिका खारिज
याचियों का दूसरा आरोप था कि कैबिनेट मंत्री रहते हुए आजम खां ने शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद के प्रति प्रेस विज्ञप्तियों के जरिए ‘आपत्तिजनक बयान’ (हेट स्पीच) दिए, जो कानून की मंशा के खिलाफ है। याचियों ने इस मुद्दे पर आजम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के निर्देश देने की गुजारिश की साथ ही उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त किए जाने का आग्रह भी किया।

अदालत ने कहा कि एफआईआर दर्ज कराने के लिए याचियों के पास विकल्प खुला है कि वे इसके लिए एसएसपी या संबंधित कोतवाल को अर्जी दे सकते है, या फिर शिकायती अर्जी निचली अदालत में दे सकते थे। लेकिन ऐसा लगता है कि उन्होंने ऐसा नहीं किया।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की एक नजीर का हवाला देकर प्राथमिकी संबंधी निर्देश देने के आग्रह को खारिज कर दिया। साथ ही इसके लिए उन्हें समुचित फोरम में अपील करने की छूट देने के साथ ही याचिका खारिज कर दी।
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जव्वाद पर जमकर उगली आग

गौरतलब है कि बीते दिनों आजम खां अपनी बयानबाजी के कारण विवादों में रहें हैं। आजम ने इस दौरान ‌शिया धर्मगुरू मौलाना कल्बे जव्वाद को जमकर निशाना बनाया। आजम ने शिया वक्फ बोर्ड के चुनाव टाले जाने पर कल्बे जव्वाद को दोषी ठहराया था। चुनाव टल जाने से आजम इतने बौखलाए हुए थे कि उन्होंने जव्‍वाद को आतंकवादी तक कह दिया था।

आजम ने बयान दिया था कि ढोंगी धर्मगुरु ने ईराक के लिए जो शहीदी जत्थे तैयार किए थे उससे यह साबित हो गया है कि वे राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर के आतंकवादी हैं।

आजम ने कहा था कि धर्मगुरु (जव्वाद) उत्तर प्रदेश में आरएसएस के साथ मिलकर गृह युद्ध कराने का मंसूबा तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब शिया वक्फ बोर्ड के चुनाव नतीजे ‘अलीबाबा’ को उसकी असलियत बता देंगे।

धर्मगुरु ने अपने भाजपाई आकाओं व आरएसएस के आशीर्वाद से कुछ दिनों के लिए ऑक्सीजन जरूर पा ली है, लेकिन चुनाव टलवाने का हथकंडा ज्यादा दिन चलने वाला नहीं है। आजम ने जव्वाद पर बयानबाजी के अलावा कई बार उल्टेसीधे बयान दिए। जिससे नाराज होकर उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त करने की याचिका दायर की गई।
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