हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने नोटबंदी के बाद बैंकों व एटीएम पर लगी लाइनों में होने वाली तनातनी के दौरान नागरिकों की भावनाओं का ख्याल रखने को कहा है। अपनी जरूरतों के लिए घंटों लाइन में खड़े रहने की वजह से विवाद होने पर लोगों के प्रति संवेदनशीलता बरतते हुए विवादों की जांच की जानी चाहिए।
जस्टिस अजय लांबा और जस्टिस डॉ. विजय लक्ष्मी ने यह टिप्पणी फैजाबाद में कुछ युवकों द्वारा कैशियर को काम करने से रोकने और घात लगाकर हमला करने के मामले में दर्ज एफआईआर खारिज करवाने को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान की।
फैजाबाद के महराजगंज थाने के पूरा बाजार में शिवेंद्र सिंह व अन्य युवकों पर इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें कहा गया कि आरोपी युवक नोटबंदी के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा में अपना काम करवाने पहुंचे थे।
उन्हें लाइन तोड़ने से रोका गया, पर वे नहीं माने। वे जबरन बैंक में घुसे और कैशियर ऑफिस में पहुंचकर काम रुकवा दिया। उन्होंने कैशियर को धमकाया। शाम को जब कैशियर घर लौट रहा था तो उन्होंने घात लगाकर उसे जान से मारने का प्रयास किया।