बंथरा में नाबालिग से गैंगरेप के करीब 15 साल पुराने एक मामले में दो आरोपियों इंदर और राजेश को किशोर न्याय बोर्ड (जेजे) ने बालिग करार दिया है। दोनों ने हाईकोर्ट में खुद को नाबालिग बताया था।
तब हाईकोर्ट ने यह मामला जनवरी में जेजे बोर्ड को सौंपकर सुनवाई के लिए कहा था। जेजे बोर्ड ने अपने फैसले में स्कूली रिकॉर्ड को तरजीह देते हुए आरोपियों की मंशा पर सवाल उठाए। कहा, आरोपी न्याय नहीं बल्कि मामले को लटकाना चाहते थे।
सुनवाई के शुरुआती 4 महीने बोर्ड में आए तक नहीं। करीब 15 तारीखों पर नहीं आए। वजह तक बताना मुनासिब नहीं समझा। इसके बाद समन, नोटिस और वारंट भिजवाने पड़े। आरोपियों की मंशा संदेहजनक है।’
आरोपियों ने खुद को नाबालिग बताने के लिए परिवार रजिस्टर का सहारा लिया। बोर्ड सदस्यों डॉ. रश्मि रस्तोगी और दिनेश पांडेय ने इंदर और राजेश के स्कूली रिकॉर्ड को फैसले का आधार बनाया।
आरोपी बोले - बोर्ड का कार्यकाल खत्म
जेजे एक्ट में स्कूली रिकॉर्ड को परिवार रजिस्टर से ज्यादा दमदार साक्ष्य माना गया है। साथ ही, बोर्ड ने आरोपियों की मेडिकल करवाने की मांग इस आधार पर खारिज कर दी कि दोनों पढ़े-लिखे हैं और स्कूली रिकॉर्ड उपलब्ध होने पर मेडिकल की जरूरत नहीं मानी जाती। इंदर और राजेश दोनों बंथरा और उन्नाव के सरकारी स्कूलों में पढ़े थे।
बालिग करार दिए जाने के बाद सामूहिक दुराचार कांड के आरोपियों ने फैसले के खिलाफ जिला जज के समक्ष अपील की है।
इसमें कहा गया है कि जेजे बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, ऐसे में उसका निर्णय मान्य नहीं है। जिला जज एन के सहाय ने मामले को स्वीकार करते हुए 1 अक्टूबर की तारीख तय की है।
जेजे एक्ट है या ढाल
जेजे एक्ट जघन्य अपराध के आरोपियों के लिए एक ढाल बनता जा रहा है। केंद्र सरकार ने हाल ही में इस एक्ट में जघन्य अपराधों में आरोपियों को 16 वर्ष तक ही नाबालिग मानने का निर्णय किया है।
हालांकि पुराने मामले ही इतने हैं कि उससे आने वाले कुछ समय बोर्ड में निर्णयों में देरी की संभावना जताई जा रही है।
आंकड़ों में हाल
वर्ष/अपराध--हत्या--हत्या का प्रयास--गैर इरादतन हत्या--दुराचार--अपहरण--आर्म्स एक्ट
2013--105--33--26--196--106--35
2012--120--19--13--123--89--25
2011--81--24--23--146--74--19
2010--70--21--16--83--45--25
2009--42--13--04--36--31--18