प्रधानमंत्री आवास योजना-सबके लिए आवास (शहरी) मिशन के तहत बनने वाली गरीबों के आवासों की गुणवत्ता, आवंटन और आगे की योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन के लिए सरकार ने निगरानी व तकनीकी समितियों का गठन किया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में निगरानी समिति तो मिशन निदेशक की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय मूल्यांकन समिति बनाई गई है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएएवाई) के तहत बनने अधिकांश आवासों की गुणवत्ता को लेकर अक्सर शिकायतें मिलती रहती हैं। वहीं मकान बनने के बाद काफी समय तक लाभार्थियों को आवंटन नहीं मिल पाता है। सरकार को तमाम जिलों में तय समयसीमा बीतने के बावजूद पीएमएवाई के तहत स्वीकृत परियोजनाएं पूरी नहीं हो पाने की जानकारी भी मिली हैं। इन समस्याओं के मद्देनजर सरकार ने अब गरीबों के लिए बने आवासों की गुणवत्ता, लाभार्थियों को समय से आवंटन देने और धीमी प्रगति वाली परियोजनाओं को गति देने के लिए की जा रही कार्यवाही की निगरानी करने की रणनीति तैयार की है।
चूंकि सरकार द्वारा संचालित सभी कल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लोगों को दिलाने को लेकर प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय निगरानी समिति का गठन कर दिया गया है। इसके अलावा दो सदस्यीय राज्य स्तरीय मूल्यांकन समिति का भी गठन किया गया है, जो योजना के डीपीआर से संबंधित तकनीकी व आर्थिक मूल्यांकन करेगी।
यह है निगरानी समिति
मुख्य सचिव- अध्यक्ष, प्रमुख सचिव/सचिव नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन विभाग- उपाध्यक्ष, प्रमुख सचिव/सचिव नगर विकास- सदस्य, प्रमुख सचिव/सचिव वित्त- सदस्य, प्रमुख सचिव/सचिव राजस्व- सदस्य, प्रमुख सचिव/सचिव आवास एवं शहरी नियोजन- सदस्य, प्रमुख सचिव/सचिव पर्यावरण- सदस्य, संयोजक राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति- सदस्य, मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक उप्र- सदस्य और निदेशक राज्य नगरीय विकास अभिकरण- सदस्य।
गुणवत्ता परखने के लिए बनेगी प्रौद्योगिकी उप मिशन
प्रधानमंत्री आवास योजना- सबके लिए आवास (शहरी) मिशन के अधीन एक प्रौद्योगिकी उप-मिशन का भी गठन किया जाएगा। यह मिशन योजना के तहत बनने वाले आवासों की गुणवत्ता पर नजर रखने के साथ ही योजना क्रियान्वयन में आधुनिक तकनीक, हरित प्रौद्योगिकी व भवन सामग्री के प्रयोग के लिए सुझाव भी देगा।