हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी की संरक्षित इमारतों व स्मारकों की हिफाजत व अतिक्रमण हटाने के मामले में अहम कदम उठाया है।
कोर्ट ने निगरानी समिति बनाए जाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार को संबंधित विभागों के वरिष्ठ अफसरों के नाम सुझाने के निर्देश दिए हैं।
जस्टिस इम्तियाज मुर्तजा एवं जस्टिस विनय कुमार माथुर की खंडपीठ ने सोमवार को यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता सैयद मोहम्मद रिजवी की जनहित याचिका पर दिया।
याची रिजवी के मुताबिक शहर में ऐतिहासिक महत्व वाली व पुरातत्व विभाग से संरक्षित भूलभुलैया, बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा, रूमी गेट समेत छोटी-बड़ी 364 इमारतें व स्मारक हैं।
इनकी सूची भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने दाखिल की है। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।
इसके बावजूद इनको नुकसान पहुंचाने या इनमें अतिक्रमण किए जाने की बाबत कोई भी प्राथमिकी पुलिस ने अभी तक दर्ज नहीं कराई है।
जबकि, इन इमारतों के संरक्षण संबंधी 2010 के संशोधित कानून के तहत इन्हें नुकसान पहुंचाने आदि के लिए दो साल तक की सजा व एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
याची वकील ने राजधानी की ऐसी इमारतों की मुकम्मल हिफाजत एवं इनमें से अतिक्रमण हटाए जाने केनिर्देश दिए जाने का आग्रह किया।
साथ ही इसके लिए संबंधित महकमों के अफसरों की एक निगरानी समिति बनाए जाने की भी गुजारिश की।
उधर, राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार मामले में पूरा सहयोग करेगी।
कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 12 अगस्त को नियत कर उस रोज केंद्र व राज्य सरकार को निगरानी समिति बनाए जाने के लिए अफसरों के नाम सुझाने के निर्देश दिए हैं।