सुल्तानपुर में अधिवक्ता की हत्या के मामले में सुनवाई कर रही इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा है कि जेल और अस्पतालों में रह कर अपराध कर रहे माफिया के मामले को भी देखा जाएगा।
यह मुद्दा भी इस हत्याकांड से जुड़ा है। वहीं प्रमुख सचिव (गृह) पूर्व निर्धारित कैबिनेट बैठक के चलते हाईकोर्ट में पेश नहीं हो सके। सचिव मणि प्रसाद मिश्रा ने उनकी उपस्थिति से छूट के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए तीन जनवरी की तारीख तय की है। इस दिन प्रमुख सचिव गृह को दोबारा तलब किया गया है।इस मामले में बार एसोसिएशन, सुल्तानपुर ने अध्यक्ष अरुण कुमार उपाध्याय के जरिए याचिका दायर की थी।
इस पर जस्टिस डॉ. देवेंद्र कुमार अरोरा और जस्टिस राजन रॉय ने बुधवार को प्रमुख सचिव गृह को तलब किया था। उनकी जगह पेश हुए सचिव मणि प्रसाद मिश्रा ने हाईकोर्ट को आश्वस्त किया कि वे इस मामले को देखेंगे और याचिका में रखी गई शिकायतों को खत्म करने का प्रयास करेंगे।
उन्हाेंने कहा कि वे याची व मृतक अधिवक्ता के परिवार में सुरक्षा का भाव पैदा करने के लिए उचित कदम उठाएंगे। उन्हाेंने कहा कि एक रोड मैप बनाकर इस तरह की कानून व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
प्रमुख गृह सचिव को दोबारा किया है तलब
डेमो
देखेंगे, क्या पीआईएल के रूप में दर्ज कर सकते हैं- हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि अगली तारीख पर यह भी देखेंगे कि अधिवक्ता ने जो मुद्दे उठाए है उन्हें जनहित याचिका के तौर पर मंजूर किया जा सकता है या नहीं? यह भी देखा जाएगा कि सचिव क्या रोड मैप और प्रस्ताव लेकर आते हैं।
हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई 3 तारीख को करेगा। इस दिन प्रमुख सचिव गृह को दोबारा तलब किया है।
जेल सिस्टम की आड़ में सामने आया खेल-सचिव
सचिव ने अदालत से कहा कि याची ने जेल सिस्टम की खामियां उजागर की है। इसमें भी सुधार के लिए कदम उठाए जाएंगे। याची के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में बताया था कि हत्या के आरोपी ने घटना से एक दिन पहले एक अन्य मामले में कोर्ट के सामने समर्पण किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अपराधी और माफिया जेल में रह कर भी आपराधिक गतिविधियां चलवाते हैं।
हड़ताल खत्म करें सुल्तानपुर के वकीलः हाईकोर्ट ने कहा कि वे सुल्तानपुर के वकीलों से अपेक्षा करती है कि वे हड़ताल खत्म कर काम पर लौटें। अब हाईकोर्ट इस मामले को देख रही हैं।
क्या है मामलाः
सुल्तानपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता विजय प्रताप सिंह की 28 अक्तूबर को कोर्ट जाते समय गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। वह अपने भाई अधिवक्ता अजय सिंह की हत्या के मामले में मुख्य गवाह थे, और कुछ जानकारियां देने वाले थे।
साल 2010 में ट्रायल कोर्ट के आदेश पर उन्हें सुरक्षा दी गई थी, लेकिन सुल्तानपुर एसपी ने उनकी हत्या से दो महीने पहले ही इसे वापस ले लिया था। इस मामले में हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। उन्हें जवाब देना था कि सिंह को बार-बार धमकियां मिल रहींथी और निचली अदालत ने उन्हें सुरक्षा दिलाई थी तो इसे वापस क्यों लिया गया? नागरिक और वकील सुरक्षित महसूस करें, इसके लिए क्या किया जा रहा है।