कर्मचारी कल्याण निगम के कई कर्मचारियों को 26 महीने से पगार न मिलने के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकार को इसके लिए तरीका निकालने को कहा है। कोर्ट सरकार की तरफ से पेश अपर स्थायी अधिवक्ता को इस बाबत सक्षम प्राधिकारियों से निर्देश हासिल कर अदालत को अवगत कराने के आदेश दिए हैं।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने यह आदेश केबला नंद जोशी की याचिका पर दिया। याची के अधिवक्ता आलोक कुमार त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया कि याची ने सरकार की योजना के तहत स्वैच्छिक सेना निवृत्ति (वीआरएस) के लिए आवेदन किया था पर इस पर कोई फैसला नहीं किया गया।
इतना ही नहीं याची समेत निगम के कई कर्मियों को पगार भी नहीं दी जा रही है। याची को पिछले 26 महीने से पगार न मिलने की वजह से परिवार भीषण संकट से गुजर रहा है और उनके पास परिवार के किसी सदस्य के बीमार पड़ने व बच्चों के स्कूल की फीस जमा करने के लिए भी रकम नहीं है।