लखनऊ। वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज से निर्वाचित सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को पांच महीने बाद भी पद एवं गोपनीयता की शपथ न दिलाए जाने पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ की सख्ती जारी रखी है। कोर्ट ने बृहस्पतिवार को दिए आदेश में कहा कि यदि 29 मई तक पार्षद को शपथ दिलाने के आदेश का पालन नहीं किया गया तो लखनऊ की महापौर को कोर्ट में पेश होकर अपना निजी हलफनामा दाखिल करना होगा।
महापौर को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर कारण बताना होगा कि हाईकोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवज्ञा करने के लिए क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए। इसी आदेश में हाईकोर्ट ने महापौर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि इस आदेश को तत्काल अनुपालन के लिए सरकार को भेजें। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 29 मई को निर्धारित करके अग्रिम आदेशों तक लखनऊ के जिलाधिकारी को उपस्थिति से छूट प्रदान की है।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति एसक्यूएच रिजवी की खंडपीठ ने यह आदेश ललित किशोर तिवारी की याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया। याचिकाकर्ता का कहना था कि निर्वाचन न्यायाधिकरण ने उन्हें 19 दिसंबर 2025 को निर्वाचित घोषित किया था, लेकिन अब तक उनको शपथ नहीं दिलाई गई है। इस बीच पूर्व निर्वाचित सदस्य अभी भी अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है।
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में स्पष्ट कहा था कि यदि 21 मई तक याचिकाकर्ता को शपथ नहीं दिलाई गई तो लखनऊ के जिला मजिस्ट्रेट, नगर आयुक्त और महापौर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देना होगा। इसके तहत बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी और नगर आयुक्त पेश हुए थे लेकिन महापौर उपस्थित नहीं हो सकीं।
महापौर को अनुपस्थित मानकर चलेगा नगर निगम का कामकाज : हाईकोर्ट
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी के फैजुल्लागंज वार्ड से इलेक्शन ट्रिब्यूनल से निर्वाचित घोषित पार्षद को शपथ न दिलाने के मामले में महापौर के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज करते हुए स्पष्ट किया है कि नगर निगम का नियमित कार्य प्रभावित नहीं होगा। महापौर की अनुपस्थिति को अनौपचारिक अनुपस्थिति मानते हुए निगम का कामकाज नियमानुसार चलता रहेगा। कोर्ट ने आदेश में यह भी टिप्पणी की है कि महापौर अपनी वैधानिक जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रही हैं। शपथ न दिलाने का कोई कानूनी अवरोध या संतोषजनक कारण भी प्रस्तुत नहीं किया गया। मामले में बृहस्पतिवार को सुनाया गया आदेश हाईकोर्ट की वेबसाइट पर शुक्रवार को अपलोड हुआ। इसमें न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की खंडपीठ ने कहा है कि यदि न्यायालय अपने आदेशों के पालन को सुनिश्चित न कर सके तो आदेश केवल कागजी घोषणा बनकर रह जाएंगे। इससे कानून के शासन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। न्यायालय ने आदेश के बावजूद महापौर की ओर से याची को शपथ न दिलाने के अड़ियल रवैये पर सख्त लहजे में टिप्पणी करके कहा है कि संवैधानिक अदालतें अपने आदेशों की लगातार अवहेलना होने पर मूकदर्शक नहीं बनी रह सकतीं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि महापौर के अधिकारों पर रोक दंडात्मक कार्रवाई नहीं बल्कि आदेशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया संवैधानिक कदम है।