लखनऊ। हाईकोर्ट ने वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज से निर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी को पांच महीने बाद भी पद एवं गोपनीयता की शपथ न दिलाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई 21 मई तक पार्षद को शपथ नहीं दिलाई गई, तो जिला मजिस्ट्रेट, नगर आयुक्त और मेयर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होकर जवाब देना होगा।
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद लखनऊ की मेयर उपस्थित नहीं हुईं। कोर्ट को बताया गया कि वह शहर से बाहर हैं। वहीं, डीएम की जगह एडीएम (वित्त एवं राजस्व) और नगर आयुक्त कोर्ट में पेश हुए। नवनिर्वाचित पार्षद को शपथ न दिलाने पर अदालत ने इन अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से शपथ प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय मांगा गया, जिस पर कोर्ट ने एक हफ्ते की मोहलत देते हुए 21 मई की तारीख तय की है।
यह है पूरा मामला
याचिकाकर्ता ललित किशोर तिवारी के अनुसार, निर्वाचन न्यायाधिकरण ने उन्हें 19 दिसंबर 2025 को निर्वाचित घोषित किया था। इसके बावजूद पांच महीने बीत जाने पर भी उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई, जबकि पूर्व निर्वाचित सदस्य अभी भी दायित्वों का निर्वहन कर रहा है। अदालत ने रिकॉर्ड को देखते हुए पाया कि डीएम ने 23 जनवरी व 10 फरवरी को नगर आयुक्त को पत्र लिखकर धारा 85 के तहत शपथ दिलाने के निर्देश दिए थे। शासन ने भी 4 फरवरी को इस संबंध में आदेश जारी किया था। इसके बावजूद अधिकारियों की लापरवाही पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।