इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक लंबित जनहित याचिका पर तलब किए गए नगर विकास व शहरी नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव के पेश न होने पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने मामले में प्रमुख सचिव शहरी नियोजन के साथ ही मुख्य सचिव को 19 सितंबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। शुक्रवार को यह आदेश गोमती नगर जनकल्याण महासमिति की पीआईएल और इससे संबद्ध याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया।
गौरतलब है कि जब मामला पहले दौर में सुनवाई के लिए आया तो किसी ने भी कोर्ट में राज्य का प्रतिनिधित्व नहीं किया। विभिन्न जनहित के मुद्दों को उठाने वाली यह जनहित याचिका 16 साल से लंबित है। कोर्ट ने मामले में प्रमुख सचिव नगर विकास एवं शहरी नियोजन को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था।
सरकारी वकील ने कहा कि उन्होंने संबंधित प्रमुख सचिव को ई-मेल के माध्यम से सूचित किया। हालांकि वह उनके साथ बात नहीं कर सके। उन्होंने विशेष सचिव अनिल कुमार से बात की जिन्होंने आश्वासन दिया कि वह इस न्यायालय के आदेश से प्रमुख सचिव को अवगत कराएंगे। इस पर कोर्ट ने मामले को सवेरे 11:50 बजे पेश करने का निर्देश दिया।
मामला जब दोबारा सुनवाई के लिए लिया गया तो निर्देशानुसार अधिकारी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। इस पर कोर्ट ने सुनवाई 19 सितंबर तक के लिए मुल्तवी कर दी। साथ ही आदेश दिया कि सुनवाई की अगली तिथि पर प्रमुख सचिव नगर विकास एवं शहरी नियोजन और मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होंगे।
ध्वनि प्रदूषण मामले में अब 20 सितंबर को होगी सुनवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ध्वनि प्रदूषण मामले में सात साल पुरानी जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की तरफ से किसी के पेश न होने पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने शुक्रवार को डॉ. सुरेंद्र कुमार व अन्य लोगों की तरफ से वर्ष 2015 में दायर पीआईएल पर यूपीपीसीबी के चेयरमैन व प्रमुख सचिव पर्यावरण को व्यक्तिगत रूप से 20 सितंबर को कोर्ट में पेश होने को कहा है। पीआईएल में निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि प्रदूषण पर अंकुश लगाने का मुद्दा उठाया गया है।