लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी से साल भर पहले वाहन सहित गुम हुए बच्चे को अभी तक नहीं ढूंढ पाने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव गृह को तीन सप्ताह में निजी हलफनामे पर गुमशुदा व्यक्ति की तलाश में आगे हुई तफ्तीश का ब्योरा पेश करने का आदेश दिया है। साथ ही चेतावनी दी कि निजी हलफनामा न दाखिल होने पर उन्हें खुद अदालत में पेश होना होगा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 मई को निर्धारित की है।
न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह आदेश सैरून निशा की याचिका पर दिया। याचिका में लखनऊ से 22 अप्रैल 2025 को गुम हुए याची के बच्चे का मुद्दा उठाया गया है। इस मामले में अगले दिन 23 अप्रैल को गुमशुदगी की रिपोर्ट करवाई गई थी। सरकारी वकील ने बताया कि गुमशुदगी की शिकायत पर 25 मार्च 2026 को स्थानीय तालकटोरा थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। इसमें कई लोगों को बतौर आरोपी नामजद किया गया है। मामले की विवेचना जारी है। सरकारी वकील ने विवेचना के संबंध में अपर मुख्य सचिव गृह का निजी हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया। इसे कोर्ट ने प्रदान कर दिया।