इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राजधानी में धर्म स्थलों पर लगे लाउड स्पीकर हटाने में सरकारी अधिकारियों को पूरी तरह नाकाम बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अब्दुल मोईन ने प्रमुख सचिव गृह, सिविल सेक्रेटेरियट और यूपी प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के चैयरमैन को अलग-अलग व्यक्तिगत हलफनामे छह हफ्ते में दाखिल करने के लिए कहा है।
अधिकारियों को हलफनामे में बताना होगा कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए बनी 2000 की नियमावली को सख्ती से लागू करने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए हैं? अगली सुनवाई एक फरवरी 2018 को होगी। जवाब नहीं दे पाने पर अगली तारीख पर इन अधिकारियों को हाईकोर्ट में उपस्थित रहना होगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने याचिका दायर कर प्रार्थना की थी कि मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे आदि धर्म स्थलों से लाउड स्पीकर और पब्लिक एड्रेस सिस्टम हटाने के लिए सरकार को निर्देश जारी किए जाएं।
धर्म स्थलों पर इनका उपयोग भविष्य में बैन करने के लिए संबंधित पक्षों को कड़े निर्देश दिए जाएं। ध्वनि प्रदूषण (नियमन व नियंत्रण) नियमावली 2000 को लागू करना सुनिश्चित करवाया जाए। इसका पालन न होने का दुष्परिणाम आम नागरिक भोग रहे हैं।
पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी, बीमार नागरिक, बुजुर्गों को विकट स्थितियों में रहना पड़ रहा है। उनके सुनने की क्षमता और संवेदनाओं को नुकसान हो रहा है।