महाधिवक्ता के बगैर राज्य सरकार नहीं चल सकती है या फिर इससे संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है।
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यह अहम टिप्पणी सूबे में करीब हफ्ते भर से नए एडवोकेट जनरल (महाधिवक्ता) की तैनाती न किए जाने का संज्ञान लेकर मामले में की है।
कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर 25 अक्तूबर तक हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
पीसीएस अफसर हरिशंकर पांडेय के सेवा संबंधी मामले में सुनवाई के दौरान गुरुवार को अदालत को बताया गया कि प्रदेश के महाधिवक्ता सूर्य प्रकाश गुप्ता ने 18 अक्तूबर को पद छोड़ दिया है।
अब तक उनके उत्तराधिकारी (नए महाधिवक्ता) को नियुक्त नहीं किया गया है। इस पर वरिष्ठ न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह व न्यायमूर्ति महेन्द्र दयाल की खंडपीठ ने यह सख्त टिप्पणी की।
हरिशंकर पांडेय ने अपनी याचिका में खुद के खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई व इसके तहत आरोप पत्र तामील कराये जाने को चुनौती दी है।
यह मामला जब सुनवाई के लिए कोर्ट में पेश हुआ तो अदालत को बताया गया कि याची अफसर की फाइल राय के लिए महाधिवक्ता को भेजी गई थी।
कोर्ट को यह भी जानकारी दी गई कि, चूंकि महाधिवक्ता ने 18 अक्तूबर को अपना पद छोड़ दिया है और उनकी जगह अभी किसी को नियुक्त नहीं किया गया है। इस पर अदालत ने सख्त टिप्पणी की और नोटिस जारी किया।
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