हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अध्योया की 25 अगस्त से होने वाली 84 कोसी परिक्रमा की इजाजत देने के आग्रह वाली जन हित याचिका शनिवार को खारिज कर दी।
अदालत ने फैसले में कहा कि याचिका में यह दिखाने वाला कुछ भी नहीं है कि 84 कोसी परिक्रमा एक धार्मिक परंपरा हैं।
राज्य सरकार की अधिवक्ता ने कहा है कि ऐसी परिक्रमा पिछले 50 साल में कभी नहीं हुई है।
न्यायालय ने कहा कि प्रस्तावित इस परिक्रमा को धामिर्क परम्परा का हिस्सा दिखाने वाली किसी भी सामग्री के अभाव में इसकी बावत कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता, क्योंकि कोई हक पैदा नहीं होता है।
न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत महापात्र एवं न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने यह फैसला स्थानीय वकील महेश गुप्ता की इस जनहित याचिका पर शुरुआती सुनवाई के बाद सुनाया।
इसमें राज्य सरकार समेत अन्य पक्षकारों को, 84 कोसी परिक्रमा संपन्न कराने के निर्देश जारी करने के निर्देश दिए जाने का आग्रह किया गया था।
साधु संन्यासियों व अन्य श्रद्धालुओं द्वारा की जाने वाली इस परिक्रमा को, हिन्दू धार्मिक प्रथाओं की हिफाजत के लिए शांतिपूर्वक कराने देने के भी निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
याची के वकील दिनेश चंद्र का कहना था कि त्रेता युग में अयोध्या नरेश महाराज दशरत ने बस्ती जिले के मखौड़ा नामक जगह पर पुत्र प्राप्त करने के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ किया था।
उस समय चूंकि कोशल राज्य 84 कोस (मौजूदा छह जिलों) की सीमा में फैला था इसलिए साधु-संन्यासी यह 84 कोसी परिक्रमा करते हैं। यह परिक्रमा मखौड़ा से शुरू होकर वहीं खत्म होती है।
इसी परिप्रेक्ष्य में 25 अगस्त से 13 सितंबर के बीच इसका आयोजन किया गया है। याची ने इसे शांतिपूर्वक संपन्न कराए जाने का आग्रह किया था।
उधर, राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने मुख्य स्थायी अधिवक्ता आईपी सिंह के साथ याचिका का विरोध किया। उनका कहना था कि पिछले 50 साल में इस समय में ऐसी कोई भी परिक्रमा नहीं हुई।
यह परिक्रमा हरसाल चैत्र माह में होती है, जिसका इस बार समय 25 अप्रैल से 20 मई के बीच का था, जो अब बीत चुका है। उनका यह भी कहना था कि इस परिक्रमा का मकसद श्रीराम मंदिर बनाने का कहा गया है, जबकि अयोध्या में विवादित स्थल पर सुप्रीमकोर्ट ने यथास्थिति बहाल रखने को कहा है।
ऐसे में छह जिलों से होकर गुजरने वाली इस परिक्रमा से यथास्थिति बहाल रखने के आदेश का पालन में परेशानी हो सकती है।
अपर महाधिवक्ता ने बताया कि इस प्रस्तावित परिक्रमा में विभिन्न अंचलोंसे कार्यकर्ताओं व साधु-संतों के बड़ी संख्या मेंआने की संभावना के मद्देनजर सरकार व जिला प्रशासन ने कार्रवाई की। गौरतलब है कि इस प्रस्तावित परिक्रमा पर राज्य सरकार ने रोक लगा रखी है।
यह जनहित याचिका 23 अगस्त को दायर हुई और अदालत की इजाजत को शनिवार को सुनवाई के लिए पेश हुई।
इसके पहले 22 अगस्त को एक अन्य वकील प्रमोद पांडेय ने भी इसी मामले में परिक्रमा में कोई बाधा न पैदा किए जाने के आग्रह वाली एक अन्य याचिका दायर की थी, जो शनिवार को सुनवाई की सूचीबद्ध थी, लेकिन इस पर याची वकील बहस के लिए पेश नहीं हुआ। इससे, इस पर अगले हफ्ते सुनवाई संभावित है।