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आम्रपाली ग्रुप के निदेशक पर हाईकोर्ट ने लगाया 50 हजार का जुर्माना, पढ़ें क्या है पूरा मामला

Wed, 20 Jan 2021 09:35 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
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फाइल फोटो
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उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने तथ्यों को छिपा कर प्रार्थना पत्र दाखिल करने व बेंच हंटिंग की कोशिश करने पर नाराजगी जताते हुए आम्रपाली समूह के निदेशक अजय कुमार पर 50 हजार का हर्जाना ठोका है। निदेशक इस समय दिल्ली के मंडोली जिला कारागार में निरुद्ध है। अदालत ने आदेश दिए हैं कि हर्जाने की रकम को दो सप्ताह में अवध बार एसोसिएशन में जमा करा दी जाए। 
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न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने यह आदेश अजय कुमार के प्रार्थना पत्र पर दिया। याची ने इसमें उसे मिली अनतरिम जमानत की अवधि को बढाने की मांग की थी। न्यायालय ने कहा कि याची ने न्यायालय की प्रक्रिया का दुरूपयोग करने की कोशिश की है  इसलिए उस पर 50 हजार रुपये हर्जाना लगाया जाए। 

कोर्ट ने मंडोली कारागार के डॉक्टरों और जेल अधीक्षक की भी खिंचाई करते हुए कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि जेल के डॉक्टर व अधीक्षक अभियुक्तों को मेडिकल सर्टिफिकेट देने के मामले में काफी उदार हैं। 
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मालूम हो कि इस मामले के एक अन्य अभियुक्त अनिल शर्मा को जेल के चिकित्सकों द्वारा जारी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही 8 दिसम्बर 2020 को अंतरिम जमानत प्राप्त हुई थी लेकिन न्यायालय के आदेश पर एम्स के डॉक्टरों की टीम ने जब उसकी जांच की तो उसे कोई गम्भीर बीमारी से ग्रसित नहीं पाया गया। 
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इसके बाद इसी जेल के डाक्टरों ने अजय कुमार के लिए भी मेडिकल रिपोर्ट जारी कर दी। कोर्ट ने इसी बात पर नाराजगी जताते हुए यह टिप्पणी की। याची द्वारा 18 सितम्बर 2020 को उसे मिली दो महीने की अंतरिम जमानत बढाने की मांग की गई थी। 

बाद में 3 दिसम्बर 2020 को न्यायालय ने याची को 31 दिसम्बर 2020 तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। न्यायालय ने पाया कि याची के अधिवक्ता वर्तमान प्रार्थना पत्र को उसी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध कराना चाहते थे जिसने 18 सितम्बर को आदेश पारित किया था।

अदालत ने कहा कि सारी कोशिश इसलिए थी कि वर्तमान प्रार्थना पत्र एक विशेष बेंच के समक्ष न सूचीबद्ध होकर उसी बेंच के समक्ष जाए जिसने 18 सितम्बर का आदेश पारित किया था। प्रार्थना पत्र में उस आदेश को भी नहीं लगाया गया था जिसमें न्यायालय ने 31 दिसम्बर तक याची को आत्म समर्पण करने का आदेश दिया था। यह भी पाया गया कि एक लिपिक  से यह भी रिपोर्ट लगवा ली गई कि मामला गलत तरीके से सूचीबद्ध हो गया है।
 
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