उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने तथ्यों को छिपा कर प्रार्थना पत्र दाखिल करने व बेंच हंटिंग की कोशिश करने पर नाराजगी जताते हुए आम्रपाली समूह के निदेशक अजय कुमार पर 50 हजार का हर्जाना ठोका है। निदेशक इस समय दिल्ली के मंडोली जिला कारागार में निरुद्ध है। अदालत ने आदेश दिए हैं कि हर्जाने की रकम को दो सप्ताह में अवध बार एसोसिएशन में जमा करा दी जाए।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने यह आदेश अजय कुमार के प्रार्थना पत्र पर दिया। याची ने इसमें उसे मिली अनतरिम जमानत की अवधि को बढाने की मांग की थी। न्यायालय ने कहा कि याची ने न्यायालय की प्रक्रिया का दुरूपयोग करने की कोशिश की है इसलिए उस पर 50 हजार रुपये हर्जाना लगाया जाए।
कोर्ट ने मंडोली कारागार के डॉक्टरों और जेल अधीक्षक की भी खिंचाई करते हुए कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि जेल के डॉक्टर व अधीक्षक अभियुक्तों को मेडिकल सर्टिफिकेट देने के मामले में काफी उदार हैं।
मालूम हो कि इस मामले के एक अन्य अभियुक्त अनिल शर्मा को जेल के चिकित्सकों द्वारा जारी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही 8 दिसम्बर 2020 को अंतरिम जमानत प्राप्त हुई थी लेकिन न्यायालय के आदेश पर एम्स के डॉक्टरों की टीम ने जब उसकी जांच की तो उसे कोई गम्भीर बीमारी से ग्रसित नहीं पाया गया।