जिस तेजी से इस पुनर्गठन की कवायद शुरू हुई है, इसका असर भविष्य में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार पर भी पड़ सकता है। कई ऐसे विभागों का एक दूसरे में विलय का प्रस्ताव है जिनके वर्तमान में अलग-अलग मंत्री हैं।
इन सुझावों पर प्रशासकीय विभागों से मांगी गई राय
चकबंदी, हथकरघा, पंचायतीराज, रेशम विभाग का विलय: समिति ने चकबंदी विभाग को राजस्व विभाग में, हथकरघा विभाग को उद्योग विभाग में, रेशम विभाग को उद्यान विभाग में तथा पंचायतीराज विभाग को ग्राम्य विकास विभाग में विलय करने को कहा है।
समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक व दिव्यांगजन विभाग होंगे एक : समाज कल्याण विभाग, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग व दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की कार्य प्रकृति लगभग एक समान बताई गई है। इन विभागों का आपस में एकीकरण करने को कहा गया है। इसी तरह अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम, पिछड़ा वर्ग वित्त विकास निगम को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम में एकीकृत करने को कहा गया है।
वित्त विभाग के कई निदेशालय अप्रसांगिक, होगा पुनर्गठन : समिति ने वित्त विभाग के अंतर्गत मौजूदा विभागाध्यक्ष कार्यालयों व निदेशालयों का पुनर्गठन करने की संस्तुति की है। इसके अंतर्गत बचत निदेशालय की अब आवश्यकता न बताते हुए इसके जिला स्तरीय पदों का समायोजन कोषागार व अन्य कार्यालयों में करने की सिफारिश है। इसी तरह बचत निदेशालय के कार्मिकों का समायोजन कोषागार निदेशालय में करने को कहा गया है।
बजट निदेशालय व फिजिकल प्लानिंग एवं रिसोर्सेज निदेशालय का आपस में विलय कर पदों का नए सिरे से निर्धारण करने को कहा गया है। वित्तीय सांख्यिकीय निदेशालय को कोषागार निदेशालय में तथा स्थानीय निधि लेखा परीक्षा निदेशालय व मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां व पंचायतें को आपस में विलय कर पदों का पुनर्गठन करने की सिफारिश है।
राज्य नीति आयोग का हो गठन
राज्य योजना आयोग द्वारा दैनिक प्रकृति के कार्य किए जा रहे हैं। संस्था में नीति अनुसंधान करने तथा विभागों के साथ वैचारिक आदान-प्रदान के लिए केंद्र सरकार के नीति आयोग की तरह राज्य नीति आयोग का गठन की संस्तुति की गई है।
विकास, अन्वेषण व प्रयोग प्रभाग होगा खत्म : विकास अन्वेषण व प्रयोग प्रभाग की अब जरूरत नहीं बताई गई है। इस प्रभाग को समाप्त कर इनके कर्मियों को अन्य प्रभागों में शामिल करने को कहा गया है। इसी तरह राज्य नियोजन संस्थान में स्थापित मूल्यांकन प्रभाग, योजना अनुश्रवण व मूल्य प्रबंधन विभाग तथा जनशक्ति नियोजन प्रभाग का आपस में विलय करने को कहा गया है। इस नवगठित प्रभाग को मौजूदा कार्यों के साथ प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के लिए गठित समिति की संस्तुतियों के क्रियान्वयन व अनुश्रवण की जिम्मेदारी देने का सुझाव दिया गया है।
कई प्रभाग व संस्थाएं होंगी इधर से उधर
प्रदेश में कार्मिकों के प्रशिक्षण के लिए कार्मिक विभाग नोडल विभाग है। नियोजन विभाग के प्रशिक्षण प्रभाग को समाप्त कर कार्मिक विभाग के नियंत्रण में लाने का प्रस्ताव है। इसी तरह नियोजन विभाग के अधीन कार्यरत भूमि उपयोग परिषद को राज्य योजना आयोग में, यूपी राज्य जैव ऊर्जा बोर्ड को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत विभाग तथा गिरि विकास अध्ययन संस्थान को उच्च शिक्षा विभाग को हस्तांतरित करने को कहा गया है।
जल शक्ति विभाग को मजबूत बनाने की सिफारिश : भविष्य में एकीकृत व समग्र रूप से जल संसाधन की मांग व आपूर्ति का प्रबंधन करने के लिए महत्वपूर्ण सिफारिश की गई है। पहला, प्रदेश की सभी मुख्य आठ नदियों के लिए एक-एक बेसिन जल प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया जाए। इसमें जल प्रबंधन से संबंधित सभी विभाग को। बेसिन स्तर पर उप बेसिक इकाइयों का गठन किया जाएगा। वर्तमान विभागीय अधिकरियों में से ही प्राधिकरण-उपबेसिन इकाइयों में अधिकारियों की तैनाती का सुझाव है।
जिला स्तर पर एकीकृत जल प्रबंधन कार्य डीएम के नेतृत्व में जल से संबंधित अधिकारियों को देने तथा विकास खंड स्तर पर सहायक विकास अधिकारी एकीकृत जल प्रबंधन की तैनाती का प्रस्ताव किया गया है। इसी तरह हर जिले में खंड अधिशासी अभियंता के नेतृत्व में तीन सहायक अभियंताओं के साथ एक अलग संवर्ग गठित करने को कहा गया है।