हाईकोर्ट लखनऊ बेंच के एक सिपाही के सेकंड प्रमोशनल ग्रेड पे की याचिका पर दिए गए फैसले से सेकंड ग्रेड पे के लिए संघर्ष कर रहे सूबे के तमाम सिपाही-दीवानों की उम्मीदें भी जाग उठी हैं।
अदालत ने अपने फैसले में शासन को छह हफ्ते में याची सिपाही को 4200 का ग्रेड पे, एरियर और भत्ते के साथ ही 12 प्रतिशत की दर से ब्याज देने का आदेश दिया है।
सिपाही कलीम अहमद ने सेकंड प्रमोशनल ग्रेड पे (2800 से 4200) को लेकर चार मई 2010, 22 दिसंबर 2011 और 17 मार्च 2012 को जारी शासनादेश का हवाला देते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की थी।
पढ़ें-फटकार के बाद सुधरी सपा सरकार
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता एमपी राजू का कहना है कि 16 साल की सेवा पूरी करने के बाद भी सिपाही को सेकंड ग्रेड पे का लाभ नहीं मिल रहा था जबकि इस बाबत शासन और पुलिस हेडक्वार्टर से आदेश जारी किए जा चुके हैं।
हाईकोर्ट ने19 नवंबर को याचिकाकर्ता को शासनादेश के मुताबिक लाभ दिए जाने का फैसला सुनाया।
डीजीपी ने भी लिखा था पत्र
डीजीपी देवराज नागर ने यूपी पुलिस में अराजपत्रित अधिकारियों व कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां दूर करने के लिए के लिए गत आठ सितंबर को प्रमुख सचिव गृह को पत्र भी लिखा था।
डीजीपी ने पत्र में लिखा है कि सिविल पुलिस के 2054 दीवानों को 2800 की जगह 4200 ग्रेड पे देने पर 1400 रुपये प्रतिमाह की दर से 3,45,07,200 रुपये वार्षिक और 892 दरोगा (एसआई-एम, आशुपिलिक/एएसआई-एम, निरीक्षक) का ग्रेड पे 4600 के बाद अगले ग्रेड पे 4800 को इग्नोर करके 5400 किए जाने पर 600 रुपये प्रतिमाह की दर से 64,22,400 रुपया वार्षिक बढ़ेगा।
डीजीपी के पत्र के मुताबिक इस प्रस्ताव की बजट समीक्षा करवा ली गई है। उन्होंने पत्र में यह भी बताया था कि प्रस्ताव से वित्त नियंत्रक भी सहमत हैं।