हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 7 साल पहले कलुआ गैंग के सरगना कल्लू उर्फ राजाराम यादव को मुठभेड़ में मार गिराने वाली टीम के एक दरोगा को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन न दिए जाने के मामले में डीजीपी के आदेश को रद्द कर दिया है।
अदालत ने मामले को पुन: डीजीपी के पास वापस भेजकर फैसले के प्रकाश में फिर से गौर करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने फैसले में कहा कि जब संबंधित समिति की सिफारिशें ही कानून के मुताबिक नहीं तो उसके आधार पर डीजीपी का आदेश कैसे जायज हो सकता है।
न्यायमूर्ति अनिल कुमार ने शुक्रवार को यह फैसला दरोगा विजय वीर सिंह सिरोही की वर्ष 2011 की याचिका को मंजूर कर सुनाया इसमें डीजीपी के28 जुलाई 2011 के आदेश को कानून की मंशा के खिलाफ बताकर चुनौती दी गई थी।
इस आदेश के तहत याची को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देने से इन्कार किया गया था। याची का कहना था कि 10 दिसंबर 1998 को वह सिविल पुलिस में बतौर उपनिरीक्षक तैनात हुआ।
16 जनवरी 2006 को डकैतों केकलुआ गैंग से मुठभेड़ के लिए जो एसओजी टीम बनी उसमें वह शामिल था। इस मुठभेड़ में कलुआ मारा गया था।
इस मामले में 17 लोगों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया। आईजी बरेली रेंज व डीआईजी की याची के पक्ष में की गई सिफारिश के बावजूद उसे प्रमोशन नहीं दिया गया।
(इस खबर पर प्रतिक्रिया देने के लिए नीचे के बॉक्स में कमेट करें, शेयर करने के लिए फेसबुक शेयर बटन पर क्लिक करें)