हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सूबे की मौजूदा सपा सरकार के दौरान मुजफ्फरनगर समेत अब तक हुए सभी दंगों की सीबीआई से जांच कराने के आग्रह वाली पीआईएल पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
कोर्ट ने राज्य सरकार कोपक्ष पेश करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। अदालत ने दंगों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं की स्थिति से भी अवगत कराने को कहा है।
न्यायमूर्ति इम्तियाज मुर्तजा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार त्रिपाठी द्वितीय की खंडपीठ ने मंगलवार को यह आदेश सामाजिक कार्यकर्त्री नूतन ठाकुर की पीआईएल पर दिया।
इसमें याची ने प्रदेश में सपा सरकार बनने के बाद 15 मार्च 2012 से अब तक हुए सभी बड़े दंगों/जातीय लड़ाईयों की जांच सीबीआई की एसआईटी से कराए जाने के निर्देश दिए जाने की गुजारिश की है।
साथ ही मुजफ्फरनगर दंगे की जांच के लिए गठित अवकाशप्राप्त न्यायमूर्ति विष्णुसहाय आयोग की जांच का दायरा सभी दंगों की जांच के लिए बढ़ाए जाने का भी आग्रह किया है।
याची का कहना है कि सीबीआई जांच से ही दंगों केलिए वास्तविक रूप से जिम्मेदार बेनकाब हो सकेंगे।
याची का आरोप है कि पिछले डेढ़ साल में सांप्रदायिक हिंसा की जितनी भी घटनाएं हुईं, उनमें पुलिस ने एक खास समुदाय के आरोपियों के प्रति कार्रवाई करने में शिथिलता बरती, जिससे दूसरे दूसरे समुदाय के लोगों में सरकार के प्रति अविश्वास की भावना घर कर गई है।
उधर, राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने कोर्ट को बताया कि सरकार खुद मामले में प्रभावी कार्रवाई कर रही है।
उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकार हालिया मुजफ्फरनगर दंगे के प्रकरण में गंभीर है। साथ ही याचिका के संबंध में पक्ष पेश करने के लिए उन्होंने सरकार से निर्देश प्राप्त करने को समय दिए जाने का आग्रह किया।
इस पर अदालत ने मामले में राज्य सरकार से निर्देश प्राप्त करने के लिए दो हफ्ते का समय देकर इसकेबाद अगली सुनवाई नियत की है।